नैनीताल। आसमान में इस हफ्ते एक ऐसी अद्भुत खगोलीय आतिशबाजी देखने को मिलेगी जिसका दुनिया भर के स्टारगेजर्स (तारे निहारने वाले) साल भर इंतजार करते हैं। प्रसिद्ध हैलिस धूमकेतु के मलबे से निकलने वाली ओरियोनिड उल्का बौछार इस सप्ताह अपने चरम पर होगी जो तड़के के अंधेरे को चमकीले टूटते तारों से सराबोर कर देगी।
खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार, यह अनूठी घटना 21 अक्तूबर की रात से शुरू होकर 22 अक्तूबर की अल सुबह तक अपने उच्चतम चरम पर रहेगी। इस दौरान प्रदूषण रहित साफ आसमान में प्रति घंटे लगभग 20 उल्कापिंडों को गिरते हुए देखा जा सकेगा। ओरियोनिड उल्काओं को उनकी तेज गति और विशेष चमक के लिए जाना जाता है। जब हैलिस धूमकेतु की ओर से छोड़े गए मलबे के कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं तो घर्षण के कारण वे जल उठते हैं जिससे आसमान में रोशनी की खूबसूरत लकीरें बन जाती हैं।
तड़के तीन बजे दिखेगा सबसे बेहतरीन नजारा
इस साल इस अद्भुत नजारे को देखने में चंद्रमा की तेज रोशनी एक बड़ी बाधा बनेगी, क्योंकि इस रात आसमान में लगभग 77 फीसदी चमकीला वैक्सिंग गिब्बस (बढ़ता हुआ) चांद मौजूद रहेगा। चांद की इस चमक के कारण कई हल्के उल्कापिंड आंखों से ओझल हो सकते हैं। यही वजह है कि भारत में इस नजारे को देखने का सबसे सटीक समय आधी रात के बजाय तड़के सुबह तीन बजे से लेकर सूर्योदय से ठीक पहले तक का होगा। इस समय के आसपास चंद्रमा अस्त हो जाएगा और आसमान में पूरी तरह अंधेरा छा जाएगा। इस दौरान बिना किसी दूरबीन या विशेष उपकरण के केवल नग्न आंखों से इन चमकीली लकीरों को देखा जा सकेगा।
नॉर्दर्न टॉरिड और ग्रहों की चमक बढ़ाएगी रोमांच
इस सप्ताह नॉर्दर्न टॉरिड उल्का बौछार भी शुरू हो रही है जिससे आसमान में यदा-कदा बेहद चमकीले फायरबॉल्स (आग के गोले) दिखने की संभावना बढ़ गई है। साथ ही, रात के समय सौरमंडल के विशाल ग्रह बृहस्पति और मंगल भी अपनी पूरी चमक के साथ आसमान में दिखाई देंगे। एरीज के वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र यादव ने कहा लोगों को तड़के किसी खुले और अंधेरे स्थान पर जाना चाहिए ताकि बिना किसी बाधा के इस आकाशीय घटना को देखा जा सकें।