कोसी नदी में बहते नन्हे हाथी को हथिनी ने बचाया
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कोसी नदी के तेज बहाव में हाथियों के झुंड से अलग होकर बह रहे नन्हे हाथी को उसकी मां हथिनी ने अपनी जान जोखिम में डालकर बचा लिया। नदी में बच्चे को बहता देख मां हथिनी ने बिना देर किए तेज बहाव के बीच छलांग लगा दी और सूंड से बच्चे को लपेटकर उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस दौरान कुछ देर तक हथिनी बच्चे को अपने साथ लेकर नदी के बहाव से जूझती रही। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो वन्यजीव प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
वाइल्ड लाइफ फोटो ग्राफर दीप रजवार ने हाथियों के एक झुंड का नदी पार करता वीडियो रिकार्ड किया। इसमें एक झुंड कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के जंगल से निकलकर कोसी नदी पार करते हुए रामनगर वनप्रभाग के जंगल की ओर जा रहा था। झुंड जब कोसी नदी के बीच पहुंचा तो नदी का तेज बहाव छोटे हाथी के लिए मुश्किल बन गया। बहाव की चपेट में आने के बाद नन्हा हाथी झुंड से अलग हो गया और नदी में बहने लगा। बच्चे को संकट में देख उसकी मां तुरंत वापस लौटी और तेज बहाव में उतर गई। हथिनी ने काफी मशक्कत के बाद अपने बच्चे तक पहुंचकर उसे सूंड से पकड़ लिया। इसके बाद वह बच्चे को अपने साथ लेकर नदी के किनारे की ओर बढ़ी और सुरक्षित बाहर निकाल लाई। मां और बच्चे के सुरक्षित निकलने के बाद दोनों फिर हाथियों के झुंड के साथ जंगल की ओर बढ़ गए।
राजाजी नेशनल पार्क से नेपाल तक पहुंचते हैं हाथी
बताया जाता है कि हर साल राजाजी नेशनल पार्क सहित अलग-अलग वन क्षेत्रों से होते हुए हाथियों के झुंड उत्तराखंड के विभिन्न जंगलों में आवाजाही करते हैं। कई कई बार नेपाल की सीमा तक पहुंचते हैं। इस दौरान हाथियों अपने प्राकृतिक कॉरिडोर का इस्तेमाल करते हैं। इस दौरान हाथियों को जंगलों के साथ-साथ नदियों और अन्य प्राकृतिक बाधाओं को भी पार करना पड़ता है।
कई बार नदी को पार करने के लिए बदला था स्थान
वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार ने बताया कि बीते दिन हाथियों का झुंड कोसी नदी को पार करने के लिए पहुंचा था। इस दौरान कई बड़े हाथियों ने पहले पानी के बहाव का जायजा लिया। बताया कि इसके लिए उन्होंने करीब दो से तीन अलग-अलग स्थानों का चयन किया। जिसके बाद उन्होंने नदी को पार करना शुरू किया। बावजूद इसके एक नन्हा हाथी पानी के बहाव में बहने लगा। बताया कि समय रहते मां हथिनी ने उसकी जान बचा ली।
इस तरह की घटनाएं जंगल में होने आम है, लेकिन कैमरे में इस तरह की घटनाएं काफी कम रिकार्ड होती हैं। हाथी अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए काफी संवेदनशील होते हैं।
- डॉ साकेत बडोला, निदेशक, सीटीआर।