हल्द्वानी/चोरगलिया (नैनीताल)। हंसपुर खत्ता में तेंदुए का हमला और बाद में आक्रोशित ग्रामीणों को हमलावर तेंदुए को मारने के मामले की जांच शुरू हो गई है। बहरहाल, वनाधिकारियों ने सेल्फ डिफेंस में ग्रामीणों को छूट देने का अंदरखाने फैसला कर लिया गया है। शेड्यूल-1 के जीव की जांच एसडीओ स्तर के अधिकारी करते हैं। इसमें चार्जशीट कोर्ट में 60 दिन में दाखिल करनी होती है, इससे पहले जांच का काम पूरा करना होता है। इस मामले की जांच एसडीओ सितारगंज ने शुरू कर दी है। तेंदुए को मारने वालों में जिनके नाम घटनास्थल में सामने आए हैं उनके और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान आदि दर्ज होंगे। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे नामजद मुकदमा दर्ज करने जैसी कार्रवाई अमल में लाने की बात अधिकारी कह रहे हें। बहरहाल, जांच से पहले ही अंदरखाने ग्रामीणों को छूट देने का फैसला कर लिया गया है। इसके संकेत भी अधिकारियों ने दिए हैं। वन संरक्षक सुरेंद्र मेहरा के अनुसार प्रथमदृष्टया मामला आत्मरक्षा का है, जिसके आधार पर छूट दी जा सकती है। डीएफओ डा. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि अभी अज्ञात में मुकदमा दर्ज है, जांच के बाद ही नाम शामिल करने पर तथ्य के आधार पर कोई फैसला होगा। परिस्थितिजन्य स्थितियों के बारे में जानकारी मिली है, उसमें ग्रामीणों ने आत्मरक्षा के तहत कार्रवाई की है। इसमें छूट प्रदान की जा सकती है। वहीं, आरओ रनसाली भगवंत पंत ने इलाके में टीम के साथ गश्त की। उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया कि सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। कोई भी सूचना तत्काल विभाग को दें। डब्ल्यूसीसीबी को भेजी शिकायत
वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) के स्वयंसेवक बृजमोहन पंत ने हंसपुर खत्ते में हमलावर तेंदुए के मारे जाने की शिकायत डब्ल्यूसीसीबी को भेजी है। उनका कहना था कि घटनास्थल पर वनकर्मी और पुलिस मौजूद थी, लेकिन उन्होंने तेंदुए को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया। किसान महासभा ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
किसान महासभा ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वरिष्ठ नेता बहादुर सिंह जंगी ने कहा कि लोगों पर किसी तरह वन्यजीव अधिनियम के तहत कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। यह आत्मरक्षा के तहत उठाया गया कदम था।