हल्द्वानी। डीजीपी अशोक कुमार ने कहा है कि आपदा के दौरान प्रदेश में 76 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। कुमाऊं मंडल में 59 और गढ़वाल मंडल में 17 लोगों की जान गई है। इसमें नैनीताल के 32 लोग शामिल हैं। अभी प्रदेश में 14 लापता लोगों की तलाश करना बाकी है। इनमें नैनीताल के तीन लोग शामिल हैं।
रविवार को पुलिस के बहुउद्देशीय भवन में डीजीपी अशोक कुमार ने पुलिस अधिकारियों की बैठक के बाद डीजीपी ने पत्रकारों को बताया कि आपदा में पुलिस ने बेहतरीन काम किया है। बेहतर कार्य करने वाले अधिकारी और पुलिसकर्मी 26 जनवरी को सम्मानित किया जाएगा। समीक्षा बैठक में डीआईजी नीलेश आनंद भरणे, एसएसपी प्रीति प्रियदर्शिनी, एसपी सिटी डॉ. जगदीश चंद्र, सीओ प्रमोद शाह, सीओ शातंनु पाराशर आदि मौजूद थे। डीजीपी ने बचाव कार्यों के लिए एसएसपी प्रीति प्रियदर्शिनी की पीठ भी थपथपाई।
कुमाऊं से 9426 लोगों को किया गया रेस्क्यू
हल्द्वानी। डीजीपी ने बताया कि प्रदेश में रेड अलर्ट जारी होने के बाद पहाड़ पर घूमने के लिए आ रहे 18 हजार लोगों को रोका गया। पुलिस ने पूरे उत्तराखंड में 17 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। कुमाऊं में नौ हजार 426 लोगों का रेस्क्यू किया गया।
सात हजार यात्री बचाए गए
हल्द्वानी। डीजीपी ने बताया कि इस साल 20 हजार लोग चार धाम यात्रा पर निकले थे। जैसे ही मौसम विभाग की ओर से अलर्ट जारी किया गया तो पुलिस ने भी तत्परता दिखाते हुए 13 हजार लोगों को पहले ही निकाल लिया था, जबकि सात हजार लोगों को बचाकर सुरक्षित स्थान पर भेजा गया।
टैकर्स तक नहीं पहुंची अलर्ट की सूचना
हल्द्वानी। डीजीपी ने बताया कि रेड अलर्ट जारी होने के बाद ट्रैकिंग पर निकले लोगों तक सूचना नहीं पहुंची। इसी कारण ट्रैकिंग पर निकले आठ लोग लापता हो गए। कुछ लोगों के शव बरामद हुए। डीजीपी ट्रैकिंग पर गए लोगों का पूरा आंकड़ा नहीं बता सके। उन्होंने आंकड़े जुटाने की जिम्मेदारी डीआईजी को सौंपी है।
डीजीपी ने रेलवे स्टेशन और नदी का हाल जाना
हल्द्वानी। डीजीपी अशोक कुमार ने रविवार की सुबह आपदा से क्षतिग्रस्त काठगोदाम रेलवे लाइन और हल्द्वानी रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया। डीजीपी को बताया गया कि गौला नदी में अवैध खनन के चलते आपदा के दौरान स्टेडियम और हेलीपैड क्षेत्र को भी काफी क्षति पहुंची है। राजपुरा के नाला का गंदा पानी भी नदी में खुले रुप से बह रहा था।
मौत के अलग-अलग आंकड़े बता रहे दो अधिकारी
हल्द्वानी। डीजीपी अशोक कुमार ने आपदा के दौरान कुमाऊं में मौत का आंकड़ा 59 बताया है लेकिन मंडलायुक्त सुशील कुमार का कहना था कि आपदा मेें कुमाऊं के छह जिलों में 61 लोगों की जान गई है। किस अधिकारी का आंकड़ा सही है। इसका अंदाजा लगाना कठिन है।
डीजीपी अशोक कुमार ने पत्रकार वार्ता के दौरान के दावा किया कि कुमाऊं में आपदा के दौरान 59 लोगों की मौत हुई है। दो दिन पहले 22 अक्तूबर को मंडलायुक्त सुशील कुमार ने पत्रकारों को बताया कि आपदा के दौरान कुमाऊं में 61 लोगों की जान गई है। इनमें नैनीताल जिले के 34, अल्मोड़ा के छह, चंपावत के 11, बागेश्वर के पांच, पिथौरागढ़ के चार और ऊधमसिंह नगर के एक व्यक्ति शामिल हैं। अभी तक कुमाऊं के 36 बीमार और घायलों को उपचार के लिए अस्पतालों में भेजा गया है। नैनीताल जिले के एडीएम अशोक जोशी ने भी बताया कि जिले में 34 लोगों की मौत हुई है। किस अधिकारी के आंकड़े सही हैं।