हल्द्वानी। लेखपालों के आंदोलन के चलते 11 दिन में कुमाऊं के तीन जिलों में आय और दाखिल खारिज के 33 हजार से अधिक आवेदनपत्र फाइलों में कैद होकर रह गए हैं। तहसीलों में पहुंच रहे लोगों को बैरंग लौटना पड़ रहा है।
उत्तराखंड लेखपाल संघ ने 25 जनवरी को राजस्व परिषद के अध्यक्ष और सचिव को पत्र भेजकर पांच सूत्री समस्याओं के समाधान की मांग की थी। इनमें जमींदारी भूमि विनाश अधिनियम 1950 की धारा 334 का अनुपालन कराने एवं एसआईटी द्वारा लेखपालों के उत्पीड़न संबंधी घटनाओं पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग प्रमुख थी। शासन स्तर पर मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो लेखपाल संघ ने चार फरवरी से आय और दाखिल खारिज संबंधी प्रार्थनापत्रों में आख्या दर्ज न करने का फैसला लिया था।
तभी से कुमाऊं मंडल में चंपावत, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर के लेखपाल आय और दाखिल खारिज संबंधी आवेदनों पर आख्या नहीं लगा रहे हैं। उत्तराखंड लेखपाल संघ के प्रांतीय अध्यक्ष तारा चंद्र घिल्डियाल के मुताबिक कुमाऊं के तीन जिलों में रोजाना औसतन आय के ढाई हजार और दाखिल खारिज के छह सौ आवेदन पत्रों में आख्या लगाई जाती है।
11 दिन में 33 हजार से अधिक आवेदन लटके
लेखपाल नहीं लगा रहे हैं आय और दाखिल खारिज में आख्या
तहसीलों से लौट रहे हैं प्रमाणपत्र बनवाने वाले
सीडीओ की अध्यक्षता में गठित है जांच समिति
हल्द्वानी। दाखिल खारिज मामले में कालाढूंगी क्षेत्र के दो राजस्वकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने संबंधी मामले की जांच के लिए डीएम विनोद कुमार सुमन ने सीडीओ की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की थी। जांच समिति में अपर जिलाधिकारी और दो उपजिलाधिकारियों को शामिल किया गया था। जांच समिति को एक पखवाड़े में रिपोर्ट देनी थी लेकिन समिति ने अभी तक रिपोर्ट नहीं दी है।