हल्द्वानी। कुमाऊं विश्वविद्यालय का एक और कारनामा सामने आया है। एमबीपीजी कॉलेज ने गलत तरीके से दाखिला लेने के आधार पर जिन 25 छात्रों के नाम काटे थे विश्वविद्यालय ने उनकी परीक्षा तक करवा डाली। इन विद्यार्थियों को परीक्षा में बैठने से रोकने के बजाय उन्हें नामांकन संख्या तक आवंटित कर दी गई।
एमबी कॉलेज में पिछले वर्ष छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई प्रत्याशी मीमांशा आर्य को बीएससी प्रथम वर्ष में फेल होने के बाद उसी कक्षा में फिर से दाखिला देने का मामला सामने आया था। इस प्रकरण के बाद कॉलेज प्रशासन ने वर्ष 2017-18 में बीए, बीएससी, बीकॉम प्रथम सेमेस्टर में शपथपत्र के आधार पर दाखिला लेने विद्यार्थियों की जांच करवाई थी। जांच में 25 विद्यार्थी ऐसे चिह्नित हुए जिन्होंने वर्ष 2016-17 में बीएससी, बीकॉम प्रथम सेमेस्टर में भी दाखिला लिया था और वर्ष 2017-18 में फिर से बीए और बीकॉम प्रथम सेमेस्टर में शपथपत्र लगाकर दाखिला लिया है। इसकी पुष्टि होने पर तत्कालीन प्राचार्य डॉ. जगदीश प्रसाद ने 11 दिसबंर 2017 को सभी 25 छात्रोें का दाखिला निरस्त कर इसकी सूची कालेज के नोटिस बोर्ड पर भी चस्पा करवा दी थी। कॉलेज प्रशासन ने छात्रों का दाखिला निरस्त करने की सूचना ई-मेल के माध्यम से कुमाऊं विवि को भी भेज दी लेकिन कुमाऊं विश्वविद्यालय ने एमबी कॉलेज के पत्र पर कोई ध्यान नहीं दिया। 16 दिसंबर से छह जनवरी तक चली सेमेस्टर परीक्षा में इन विद्यार्थियों को बैठने की अनुमति देने के साथ ही प्रवेशपत्र जारी कर दिए। इन छात्रों ने परीक्षा भी दी।
वर्ष 2017-18 में स्नातक प्रथम सेमेस्टर में जिन छात्रों ने गलत शपथपत्र के आधार पर दाखिला लिया था, जांच पड़ताल में पुष्टि होने के बाद उनका दाखिला निरस्त कर दिया गया था। इसकी सूचना कुमाऊं विवि के परीक्षा नियंत्रक को ई-मेल से भेजी गई थी।
- डा जगदीश प्रसाद, तत्कालीन प्राचार्य एमबीपीजी कॉलेज
यह मामला मेरी जानकारी में नहीं है। हालांकि मौजूदा समय में परीक्षा नियंत्रक का चार्ज होने के नाते मैं इस मामले की जांच कराऊंगा। दाखिला निरस्त वाले छात्रों को चिह्नित कर उनका स्नातक प्रथम सेमेस्टर का रिजल्ट रोका जाएगा।
- डॉ. संजय पंत, प्रभारी परीक्षा नियंत्रक, कुमाऊं विश्वविद्यालय