रानीखेत (अल्मोड़ा)। पहाड़ में गर्मियों की दस्तक के साथ ही पेयजल किल्लत भी शुरू हो गई है। समस्या के दौरान क्षेत्रवासियों का सहारा बनने वाले पारंपरिक पेयजल स्रोतों का जल स्तर भी गिरने लगा है, जिससे विकट समस्या खड़ी हो गई है। क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में हर तीसरे दिन पानी खुलता है, लेकिन पर्याप्त पानी न मिलने के कारण लोगों को भारी परेशानी हो रही है।
रानीखेत क्षेत्र में गगास-ताड़ीखेत पेयजल योजना से आपूर्ति होती है लेकिन इस योजना का लंबे समय से पुनर्गठन नहीं हुआ है। इसके चलते आए दिन पानी की लाइनें क्षतिग्रस्त हो जाती है। इस योजना से ताड़ीखेत ब्लॉक की 38 ग्राम सभाएं जुड़ी हैं। इन दिनों कई इलाकों में पानी की समस्या गहरा गई है। रही सही कसर पारंपरिक पेयजल स्रोतों ने पूरी कर दी है। गर्मियों में पारंपरिक पेयजल स्रोत ही लोगों का सहारा बनते थे, लेकिन चिलियानौला सहित तमाम इलाकों में पारंपरिक पेयजल स्रोतों का जल स्तर घटने से समस्या खड़ी हो गई है। दूसरी तरफ चिलियानौला ग्राम समूह पेयजल योजना भी पूरी नहीं बन सकी है। लोगों का कहना है कि योजना के वितरण टैंक बन चुके हैं, टैंकों में पर्याप्त मात्रा में पानी भी है। उनका कहना है कि वितरण लाइन बिछाने तक वैकल्पिक तौर पर पानी लोगों को बांट दिया जाए, इससे किल्लत कुछ हद तक दूर हो जाएगी। इधर, जल संस्थान ने पूर्व में पारंपरिक जलस्रोतों के रखरखाव का आश्वासन दिया था, लेकिन वह भी पूरा नहीं हो सका है।
पर्याप्त पानी न मिलने के कारण ग्रामीण क्षेत्र के लोग परेशान
चिलियानौला ग्राम समूह योजना का पानी वैकल्पिक तौर पर देने की मांग