द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। प्रधान लीसा श्रमिक ठेकेदार संगठन की यहां हुई बैठक में विभिन्न समस्याओं पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि प्रभागीय वनाधिकारी ने 2018 के लीसा गढ़ान कार्य को प्रभावित किया है। जिसके चलते करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है। साथ ही हजारों लीसा श्रमिक बेरोजगार हो चुके हैं। उनके समक्ष रोजी रोटी का संकट आ खड़ा हुआ है।
बैठक में कहा गया कि द्वाराहाट वन क्षेत्र में कई सालों से दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी कार्य कर रहे थे। उन्हें इस साल निकाल दिया गया है। उनके स्थान पर नेपाली श्रमिकों को रखा गया है। जो कि न्याय संगत नहीं है। बैठक में लीसा गढ़ान कार्य को शीघ्र सुचारु करने, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को शीघ्र बहाल करने की मांग जोर शोर से उठाई गई। ऐसा नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि 2013 तक नाप लीसे का भुगतान राज्य में निर्धारित दरों पर किया जाता था। 2014 के लीसा गढ़ान का भुगतान 2017 में किया गया। लेकिन अल्मोड़ा वन प्रभाग, सिविल सोयम में अन्य वन प्रभागों से अलग अलग दरों पर भुगतान किया गया है। इसके लिए लीसा श्रमिक अब न्यायालय की शरण में जाएंगे। कहा कि 2018 में लीसा गढ़न कार्य वर्तमान प्रभागीय वनाधिकारी की तरफ से बाधित किया गया है। जिससे अल्मोड़ा प्रभाग को 36 करोड़ रुपये के राजस्व की क्षति हुई है। बैठक में नरेंद्र बिष्ट, खीमानंद, दिगंबर सिंह, जगत सिंह, आंनद, प्रताप सिंह, नवीन पुरोहित, विरेंद्र बजेठा, विपिन पंत, मथुरा सिंह आदि मौजूद रहे।