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फोरलेन सड़कें और बड़े बांध पहाड़ में विनाश ला सकते हैं

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हल्द्वानी। शराबबंदी, खेत किसानी और महिला अधिकारों से संबंधित मुद्दों पर बुधवार को प्रदेश के कई महिला संगठन एक मंच पर आ गए। महिला मंच की पहल पर आयोजित इस सम्मेलन के पहले दिन नर्मदा बचाओ आंदोलन की सूत्रधार रही मेधा पाटकर ने कहा कि राज्य आंदोलन में महिलाओं की सशक्त भूमिका के बाद भी सपनों का उत्तराखंड नहीं बन पाया। प्रसिद्ध समाज सेविका और गांधीवादी राधा बहन ने कहा कि महिलाएं एकजुट होंगी तो सफलता मिलेगी।
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दो नहरिया स्थित एक बारातघर में आयोजित सम्मेलन में मेधा पाटकर ने कहा कि महिलाओं ने समाज के हित में प्रत्येक आंदोलनों में हिस्सा लेकर उसे मुकाम तक पहुंचाया है। उन्होंने राज्य आंदोलन के दौरान महिलाओं के साथ हुई बर्बरता को याद करते हुए कहा कि इतना होने के बाद भी आज हम अपने सपनों का उत्तराखंड नहीं बना सके हैं। सिंगूर से लेकर नंदी ग्राम तक का आंदोलन हो या फिर नर्मदा बचाओ हर आंदोलन में महिलाओं की प्रमुख भूमिका रही है।
अध्यक्षता करते हुए राधा बहन ने कहा कि यदि हम एक होकर आवाज उठाएंगे तो निश्चित रूप से सफलता मिलेगी। सरकारों के पास महिलाओं के विकास के लिए कोई नीति नहीं है यही कारण है कि आज महिलाएं भी पहाड़ से पलायन को मजबूर हैं। संचालन महिला मंच की डॉ. उमा भट्ट ने किया। सीतापुर से आई संगतिन संगठन की रिचा सिंह और पीयूसीएल की अध्यक्षा कविता श्रीवास्तव ने कहा कि सम्मेलन में महिलाओं की समस्याओं को हल कराने के लिए प्रभावी रास्ता खोजा जाएगा। जागोरी संस्था की कल्याणी मैनन ने आधार कार्ड की अनिवार्यता को महिलाओं की निजता का हनन करने वाली रणनीति करार दिया। कमला पंत ने सभी का आभार जताया। प्रसिद्ध लोक गायिका कबूतरी देवी ने शगुन गीत गाया।
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सम्मेलन में देवकी कुंजवाल, शशिप्रभा रावत, शोभा बहन, बसंती बिष्ट, सरस्वती खेतवाल, देवकी कुंजवाल, सुशीला भंडारी, ऋचा सिंह, पुष्पा चौहान, मधुबाला कांडपाल, सुनीता शाही, हीरा जंगपांगी, शीला रजवार, रेनू जोशी, कंचन भंडारी, मलिका विर्दी समेत प्रदेश भर की महिला संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

फोरलेन सड़कें और बड़े बांध पहाड़ में विनाश ला सकते हैं

मेधा पाटकर ने कहा कि फोरलेन सड़कें और बड़े बांध पहाड़ में विनाश ला सकते हैं। इससे भूकंप के प्रति बेहद संवेदनशील पहाड़ में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ेंगी जिसका असर आम जनजीवन पर पड़ेगा। उन्होंने सरकारों द्वारा पहाड़ और नदियों में कराए जा रहे खनन का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में प्रत्येक महिला को निर्भया बनकर ख़ड़े होना पड़ेगा तभी वह अपने हक हकूक प्राप्त करने में सफल होगी।

47 मिनट के भाषण में 15 बार विकास का उल्लेख

मेधा पाटकर ने अपने 47 मिनट के भाषण में 15 बार केंद्र सरकार के कथित विकास का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार पर जमकर कटाक्ष किए। गुजरात के विकास पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने नर्मदा परियोजना का शुभारंभ नहीं किया बल्कि एक दीवार का उद्घाटन कर और नर्मदा नदी की पूजा कर ढकोसला किया है।

उन्होंने कहा कि नर्मदा परियोजना के तहत डूब क्षेत्र में आने वाले गावों को 21 जुलाई को खाली कराने के निर्देश सरकार ने दिए थे लेकिन महिलाओं की शक्ति के आगे आज तक उक्त गांव खाली नहीं कराए जा सके हैं।

नोट बंदी ने महिलाओं से छीनी उनकी पूंजी

पाटकर का कहना है कि केंद्र सरकार की नोटबंदी की नीति ने महिलाओं से उनकी वह पूंजी भी छीन ली जो आज तक महिलाओं से उनके पति भी नहीं छीन पाए। उन्होंने कहा कि ऐसा करके सरकार नकदीकरण को आगे बढ़ा रही है और उसे हर जगह पैसा ही पैसा नजर आ रहा है।

कोई पीएम और सीएम नहीं करा सकता शराबबंदी
मेधा पाटकर का कहना है कि शराबबंदी करना राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है लेकिन किसी भी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री में इतनी ताकत नहीं है कि वह पूरी तरह से शराबबंदी लागू कर सकें। ऐसा इसलिए क्योंकि इस कारोबार से नेताओं को चुनाव लड़ने के लिए पैसा मिलता है। उन्होंने कहा कि महिलाएं ही हैं जो चाहें तो शराबबंदी लागू करा सकती हैं।
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आज इन मुद्दों पर होंगे प्रस्ताव पारित
जल, जंगल और जमीन
शराब और नशा
स्वास्थ्य और शिक्षा
कृषि एवं महिला किसान
राजनीति और महिलाएं
महिलाओं के खिलाफ हिंसा
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