हल्द्वानी। कुमाऊं विश्वविद्यालय द्वारा विश्वविद्यालय सभा (सीनेट) के चुनाव के लिए जारी की मतदाता सूची में तमाम खामियों को लेकर चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लग गया है। मतदाता सूची में ऐसे लोगों को भी स्थानीय पता दर्शाकर मतदाता बना दिया गया है जो कि वर्षों से विदेश में रह रहे हैं। इसके साथ ही 206 स्नातक मतदाता सदस्य ऐसे दर्शाए गए हैं जिनका पता ‘द्वारा’ दर्शाया गया है जो कि कुविवि के निर्देश का सीधा उल्लंघन है।
कुविवि में पंजीकृत स्नातकों के 15 प्रतिनिधियों का विश्वविद्यालय सभा (सीनेट) के लिए चुनाव होना है। विश्वविद्यालय की ओर से जारी की गई सदस्य मतदाता सूची में कई खामियां सामने आई हैं। विश्वविद्यालय की ओर से सदस्य मतदाता सूची में स्पष्ट रूप से निर्देश अंकित हैं कि पत्र व्यवहार का पता माननीय सदस्यों का स्वयं का होना चाहिए। सूची में अंकित सदस्यों के मार्फत नहीं होने चाहिए। इसके साथ ही मोबाइल नंबर, आधार कार्ड नंबर के आधार पर ही सूची तैयार की जाएगी लेकिन अपने ही नियमों का पालन विश्वविद्यालय ने नहीं किया। सूत्रों के मुताबिक 663 सदस्यों में से 206 सदस्यों के पते मार्फत ही दर्शाए गए हैं। इतना ही नहीं क्रमांक 1211, 1215 एवं 1227 जो पते अधूरे हैं, उन पर मतपत्र कैसे भिजवाया गया, यह सवाल भी उठ रहा है कि दो मतदाता एक ही नाम से पंजीकृत कैसे हो गए। इसी तरह दो मतदाता सदस्य इति और श्वेता अग्रवाल आस्ट्रेलिया में हैं।
ये है चुनाव की प्रक्रिया
हल्द्वानी। विश्वविद्यालय सभा (सीनेट) के प्रतिनिधियों के चुनाव की प्रक्रिया 21 अप्रैल से चल रही है। इसके तहत 21 मई को नामांकन, वापसी एवं नामांकन पत्रों की जांच के बाद मैदान में कुल 20 प्रत्याशी मैदान में हैं। विश्वविद्यालय द्वारा पंजीकृत स्नातकों को मतपत्र भी भेज दिए गए हैं। मतदाताओं द्वारा प्रत्याशियों को वरीयता क्रमांक देकर मतपत्र भरकर विश्वविद्यालय कार्यालय भेजने की अंतिम तिथि 17 जुलाई निर्धारित है। 20 जुलाई को मतपत्रों की गणना एवं चुनाव परिणाम घोषित किया जाएगा।
सीनेट सदस्य के लिए ये हैं प्रत्याशी
अचिंत बीर सिंह, अनिल कुमार, अंजू मेहता, अरविंद सिंह पडियार, अर्जुन सिंह, बीके सांगुड़ी, बहादुर सिंह पाल, गीता बिष्ट, हुकुम सिंह कुंवर, जितेंद्र कुमार भट्ट, केवलानंद सती, कैलाश चंद्र, कीमती लाल राणा, मोहन सिंह बिष्ट, नीमा पुजारी, प्रकाश चंद्र पांडे, पान सिंह रौतेला, रवि सिंह रौतेला, सुरेश डालाकोटी, शैलेंद्र पंत