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प्रकृति और संस्कृति संरक्षण में हुए बदलाव पर जताई चिंता

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रामनगर (नैनीताल)। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित हुई दो दिनी राष्ट्रीय सेमिनार में वक्ताओं ने प्रकृति और संस्कृति संरक्षण, खानपान, पहनावे, बोलचाल में हुए बदलाव पर चिंता व्यक्त की। वक्ताओं के अनुसार यदि समय रहते उपभोग की शैली में बदलाव नहीं किया तो आने वाली पीढ़ी को गंभीर समस्याओं को झेलना पड़ेगा।
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आईसीएसएसआर नई दिल्ली की ओर से प्रायोजित वैश्वीकरण के सामाजिक आर्थिक और पर्यावरण आयाम, मुद्दे अवसर, चुनौतियों पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन वाणिज्य संकाय की ओर से किया गया। शुभारंभ उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ओपीएस नेगी, पूर्व निदेशक उच्च शिक्षा उत्तराखंड डॉ. बीसी मलकानी ने किया। मुख्य वक्ता पद्मश्री अनिल प्रकाश जोशी ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में वैश्वीकरण पर प्रकाश डालते हुए संपूर्ण विश्व में प्रकृति और संस्कृति संरक्षण, खानपान, बोलचाल, पहनावे में बदलाव आदि विषयों पर गहरी चिंता व्यक्त की। कहा कि संपूर्ण देश में होने वाले अतार्किक विकास में भागीदारी करके हम (उपभोक्ता) भी योजना निर्माताओं, फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों, संभ्रांत नागरिकों के अतिरिक्त भी उतने ही दोषी है। इस मौके पर प्राचार्य डॉ. बीडी दानी, प्राचार्य डॉ. एमसी पांडे, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज और कॉमर्स के निदेशक प्रो. आरसी मिश्रा, जीजी इंस्टीट्यूट बरेली के निदेशक प्रो. एनएल शर्मा, पर्यावरणविद विजय जरदारी, महाविद्यालय की संरक्षिका प्राचार्य डॉ. हेमा प्रसाद ने उपरोक्त विषयक पुस्तक का विमोचन किया। संगोष्ठी के आयोजक सचिव डॉ. धर्मेंद्र कुमार, डॉ. जीसी पंत, डॉ. प्रीति त्रिवेदी, अनुमिता अग्रवाल, अनीता जोशी, प्रमोद जोशी, धीरेंद्र सिंह, डीएन जोशी आदि थे।
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प्रकृति में बदलाव चिंताजनक
रामनगर कॉलेज में सेमिनार
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