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सहकारी बैंक एनपीए को कम करने को सरफेसी एक्ट के तहत करें कार्रवाई

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सहकारी बैंक की बैठक - फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक के मुख्यालय भवन में गुरुवार को सरफेसी एक्ट 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत कार्यवाही करने को लेकर राज्य के 10 जिला सहकारी बैंकों के उप महाप्रबंधकों की प्रशिक्षण कार्यशाला हुई। राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक दीपक कुमार ने उपमहाप्रबंधकों को बताया कि राज्य सहकारी बैंकों द्वारा सरफेसी एक्ट 2002 के प्राविधान लागू करने से वसूली में आई है। इसके अंतर्गत अब तक 20 करोड़ से भी अधिक की वसूली की जा चुकी है तथा 25 करोड़ से अधिक की संपत्ति नीलाम की जानी है। उन्होंने जिला सहकारी बैंकों से सरफेसी एक्ट के अंतर्गत कार्यवाही करने पर जोर दिया।
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राज्य सहकारी बैंक के महाप्रबंधक एनपीएस ढाका ने प्रथम चरण सत्र का उद्घाटन करते हुए इस बात पर बल दिया कि सभी जिला सहकारी बैंक सरफेसी एक्ट 2002 के अंतर्गत प्रथम चरण के रूप में कुछ एनपीए खातों पर कार्यवाही करें जिससे लोगों में यह संदेश चला जाए कि सहकारी बैंक ऋण वसूली के प्रति पूरी तरह सजग हैं। विषय विशेषज्ञ के रूप में पैनल अधिवक्ता विवेक अग्रवाल ने बताया कि सरफेसी एक्ट के अंतर्गत बकायेदारों पर कार्यवाही से पूर्व पत्रावली को पूर्ण कर लें तथा बकायेदार का खाता एनपीए घोषित किए बिना सरफेसी की कार्यवाही न करें। विशेष आमंत्रित उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक के विधि सलाहकार एनआर चन्याल ने अपने अनुभवों को साझा कर वसूली के बारे में नई नई तकनीकी सीखने पर बल दिया। कार्यशाला में पाठ्यक्रम कोआर्डिनेटर डा. अरविंद जोशी ने भी जानकारी दी। इस दौरान महाप्रबंधक सुरेंद्र प्रभाकर, उपमहाप्रबंधक रामविलास सिंह, टीसी पंत, दीक्षा कंडवाल, हरीश तिवारी, आरती रावत, रामवीर सिंह, रामपाल सिंह, किशोर गोस्वामी, नारायणी, सौ सिंह आदि मौजूद रहे।
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सहकारी बैंक एनपीए को कम करने को सरफेसी एक्ट के तहत करें कार्रवाई
राज्य के 10 जिला सहकारी बैंकों के उप महाप्रबंधकों की कार्यशाला
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