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ग्रामीणों का दर्द देख 360 पेड़ कटवा बनवाई थी सड़क

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रामनगर (नैनीताल)। जहां एक ओर वन संरक्षण अधिनियम हमेशा निर्माण कार्यों में आड़े आता रहा है, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री स्व. नारायण दत्त तिवारी ऐसी कई समस्याओं को सुलझा चुके थे।
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नैनीताल के सांसद रहते तिवारी 20 जून 1996 को सड़क से दूर जूनियर हाईस्कूल अमगड़ी में प्रस्तावित कार्यक्रम में पहुंचे थे। उन्हें कोसी बैराज से टेड़ा गांव होकर अमगड़ी पहुंचना था। उन दिनों भयानक बारिश के चलते बरसाती नाले भी उफान पर थे। इसलिए तिवारी को खुली जीप से ले जाया जा रहा था कि तभी बागाजाला नाला उफान पर आ गया और वह नाले में फंस गए। जीप की ऊपरी सतह तक पानी आने से वह भीग गए थे, तभी उन्हें कैंटर पर बैठाकर अमगड़ी तक पहुंचाया गया। अमगड़ी में ग्रामीणों ने सड़क की मांग रखी तो तिवारी ने कहा कि मैं भी इस सड़क का भुक्तभोगी हो गया हूं। दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से उस रोड को बनवाने में बाधक बन रहे 360 पेड़ों को कटवाने की अनुमति दिलाई। तभी पाटकोट, डौन परेवा, बेतालघाट जाने वाली सड़क बन सकी। कुछ भाग कच्चा होने के बावजूद इसे प्रांतीय राजमार्ग घोषित किया जा चुका है। पक्की सड़क बनने के कारण ही अमगड़ी, भलौन, पाटकोट, गोरियादेव, डौन परेवा में रिजॉर्ट बन गए हैं। पवलगढ़ कंजर्वेशन रिजर्व (पीसीआर) से जुड़ने के कारण अब यह इलाका पर्यटन जोन बन गया है।
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