हल्द्वानी। एक बार फिर सरकार राइस मिलों के दबाव में झुक गई है। अब कैबिनेट में पास की गई नीति में ही बदलाव कर दिया गया है। चावल मिलों को फायदा पहुंचाने के लिए मंडी में खरीद की शर्त को मंडी परिक्षेत्र कर दिया है।
सरकार ने कैबिनेट में धान खरीद नीति जारी की थी। नीति जारी करते ही राइस मिलर्स इसके विरोध में उतर गए थे। उन्होंने सरकारी धान कूटने से मना कर दिया था, साथ कच्चे आढ़ती में भी रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था। इससे सरकार दबाव में आ गई। सरकार ने अब धान खरीद नीति में संशोधन कर दिया है। पहले नीति में कमीशन एजेंट के लिए मंडी परिसर में खुली नीलामी कराकर धान खरीद की शर्त रखी गई थी। अब इसे बदलकर मंडी परिसर के साथ-साथ मंडी परिक्षेत्र भी कर दिया गया है। शर्त में मंडी को संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर स्थान चिंहित करने के प्राधिकृत किया गया है। यहां भी मंडी को खुली बोली लगानी होगी।
कैबिनेट में लाई नीति को बदला
मंडी में खरीद के साथ-साथ, मंडी परिक्षेत्र में भी खरीद की दी संस्तुति
मंडी के अधिकारियों ने नहीं कराई नीलामी तो नपेंगे
मंडी के अधिकारियों ने किसानों के धान की बोली नहीं कराई तो ऐसे में अधिकारियों का नपना तय है। नीति में साफ कहा गया है कि मंडी परिक्षेत्र में भी किसानों के धान की खुली नीलामी करनी होगी।
शासन ने नीति में कुछ बदलाव किए हैं। कमीशन एजेंट को किसानों से एमएसपी में ही खरीद करनी होगी।
ललित मोहन रयाल आरएफसी कुमाऊं
मंडी में ही खरीद की जाएगी। जिस मंडी में धान खरीद के लिए जगह नहीं होगी। वहां के क्षेत्र में मंडी को स्थान ढूंढने के लिए कहा गया है। किसानों का धान बिना नीलामी के नहीं खरीदा जाएगा।
धीराज गर्ब्याल एमडी मंडी परिषद