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जरूरतमंदों की जिंदगी बेहतर करने को कीजिए देहदान

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हल्द्वानी। शल्य चिकित्सा के लिए जरूरी अंग न मिलने से कई बीमार लोगों को कष्ट सहना पड़ता है और कई मरीजों को इसकी वजह से जान से भी गंवानी पड़ती है। देहदान का संकल्प दिलाने और अंगदान की भावना का प्रसार करने के लिए वैश्य महिला समिति 10 दिसंबर को बरेली रोड स्थित लक्ष्मी शिशु मंदिर में देहदान जागरूकता शिविर आयोजित करेगी। इस मौके पर महिला समिति की अध्यक्ष सुचित्रा जायसवाल, लायनेस क्लब अध्यक्ष उषा मुकेश कुमार समेत कई महिलाएं भी शपथ पत्र भरकर देहदान का संकल्प लेंगी।
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सुचित्रा ने बताया कि देहदान का नाम सुनते ही लोग सहम जाते हैं। लोगों को देहदान के प्रति जागरूक करने के लिए इस शिविर का आयोजन किया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग देहदान करें और किसी की जिंदगी बचाने में योगदान दें। शिविर में देहदान के संकल्पित व्यक्तियों का सम्मान भी किया जाएगा। देहदान के इच्छुक व्यक्ति को अपने साथ दस रुपये का ई स्टांप पेपर, दो पासपोर्ट साइज फोटो और दो गवाह साथ में लेकर आना होगा। शिविर में महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेक्षा पांडे महिलाओं की निशुल्क जांच करेंगी।

अंगदान की इच्छा पिछले दो साल से थी, लेकिन किसी कारणवश यह नहीं कर पाई। देहदान की शपथ ले चुके एमबीपीजी के प्रो. संतोष मिश्रा ने देहदान के लिए प्रेरित किया। एमबीबीएस बेटी भव्या जायसवाल से पता चला कि एक देहदान से 12 लोगों की जान बचाई जा सकती है। इसलिए देहदान का फैसला लिया है।
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- सुचित्रा जायसवाल, अध्यक्ष, वैश्य महिला समिति
शरीर का जो मकसद है, वह पूूरा होना चाहिए। जीवित रहने के दौरान तो हम अपने सारे कर्तव्य और दायित्व पूरे करते हैं, लेकिन मृत्यु के बाद भी हमारा शरीर काम में आना चाहिए। इसलिए देहदान करना चाहती हूं। मेडिकल कॉलेज में छात्र-छात्राओं को प्रयोगात्मक क्रियाकलापों के लिए मृत शरीर उपलब्ध नहीं हो पाते। मैं इन भ्रांतियों को नहीं मानती कि मृत्यु के बाद दाह संस्कार नहीं किया गया तो मुक्ति नहीं मिलती।
- ऊषा मुकेश कुमार, अध्यक्ष, लायनेस क्लब हल्द्वानी
देहदान करने वाले को मिले इलाज में छूट
माता-पिता और पत्नी के अलावा खुद देहदान की शपथ ले चुके एमबीपीजी के प्रोफेसर संतोष मिश्रा शहर में अब तक करीब 50 से अधिक लोगों को देहदान के लिए प्रेरित कर चुके हैं। उनका मानना है कि मौजूदा समय में मेडिकल के विद्यार्थियों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए दधीचि और कर्ण की अंगदान परंपरा को पुनर्जीवित किया जाना चाहिए। प्रो. मिश्रा ने मेडिकल कॉलेज और प्रशासन से देहदान करने वालों के लिए डोनर कार्ड जारी करने की मांग की है। उनका मानना है कि ऐसे लोगों का मनोबल बढ़ाने के लिए डोनर कार्ड के जरिए इलाज में छूट की सुविधा मिलनी चाहिए।
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