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खराब चावल मामले में जिलाप्रशासन की अब टूटी खुमारी

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हल्द्वानी। खराब चावल के मामले में अब जिला प्रशासन को ध्यान आया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरित किए जा रहे राशन की व्यवस्था को मजबूत किया जाए। डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी ने जिला पूर्ति अधिकारियों और क्षेत्रीय खाद्य अधिकारियों को खाद्यान के उठाने और वितरण पर पूरी नजर रखने का निर्देश दिया है। अब पांच-पांच दुकानों का मासिक निरीक्षण करने और इसकी जांच आख्या नियमित रूप से जिला पूर्ति अधिकारी को भेजने को कहा गया है। निर्देश यह भी है कि सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता और शीर्ष निरीक्षक बेस गोदाम से मात्रा और गुणवत्ता से संतुष्ट होने के बाद ही चावल को उठाएं।
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अमर उजाला की अभी तक की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि खराब चावल वितरण के मामले में खरीद से लेकर उपभोक्ताओं को चावल बांटने तक से संबंधित संस्थाओं की भूमिका संदिग्ध है। उपभोक्ता शिकायत नहीं करते, लिहाजा उपभोक्ताओं को खराब चावल परोसने का खेल भी निर्बाध रूप से जारी रहा। ऐसे में राशन विक्रेताआें पर भी सवाल उठ रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि विशेष जांच दल की जांच रिपोर्ट तक मुख्यमंत्री केपास पहुंच गई और अभी तक जिला प्रशासन को यह ध्यान नहीं आया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली की भी जांच कर ली जाए। विशेष जांच दल का भी पूरा ध्यान गोदाम और चावल मिल मालिकों पर अधिक रहा। ऐसे में जांच से यह अहम कड़ी कुछ हद तक ओझल रही। इस समय राशन विक्रेता सब्सिडी के मामले को लेकर हड़ताल पर भी हैं।
डीएम ने आंतरिक गोदामों के संबंधित परगना अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को समय-समय पर स्टॉक का सत्यापन करने को भी कहा गया है। यह भी व्यवस्था कर दी गई है कि सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता चावल की खेप लेने से पहले वितरण प्रमाण पत्र देंगे। इस प्रमाण पत्र में ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी या क्षेत्रीय पटवारी के अनिवार्य रूप से हस्ताक्षर होंगे। यह भी निर्देश दिया गया है कि आधार से जुडे़ राशन कार्डों पर ही राशन दिया जाए। साफ है कि इन निर्देशों का पालन अगर जिला प्रशासन ने पूर्व में कराया होता तो खराब चावल के वितरण का मामला बहुत पहले पकड़ में आ जाता। यही जिला प्रशासन है जो पूर्व में यह कह रहा था कि यह पूरा मामला संभागीय खाद्य आयुक्त से संबंधित है।
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