उत्तराखंड समजा कल्याण में विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं में कथित सौ करोड़ के गोलमाल की शिकायत झूठी निकली है।
विभिन्न संस्थाओं से वसूली करने वाले गिरोह ने प्रधानमंत्री कार्यालय को इसकी झूठी सूचना दी थी। मामले में तीन सदस्यीय टीम ने जांच पूरी कर ली है जिसमें गोलमाल के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। इस संबंध में समाज कल्याण निदेशक विष्णु धानिक ने भी इस बात की पुष्टि की है कि जांच पूरी हो गई है। उन्होंने छात्रवृत्ति योजनाओं में गोलमाल की आशंका से इनकार किया है।
विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं में सौ करोड़ के घोटाले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय में की गई थी। प्रधानमंत्री कार्यालय से जांच के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र भेजा था। मुख्यमंत्री कार्यालय से समाज कल्याण निदेशक को मामले की जांच के लिए भेजा गया था।
जांच तीन सदस्यीय टीम जनजाति कल्याण विभाग संयुक्त निदेशक योगेंद्र सिंह रावत, विशेष कार्याधिकारी डा. संतोष कुमार शील और समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक जीआर नौटियाल को दी गई थी। सहारनपुर में राज्य के बच्चों को विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।
इसके तहत लगभग डेढ़ दर्जन संस्थाओं पर फर्जीवाड़ा कर उक्त योजना में गोलमाल कर सौ करोड़ का घोटाला करने का आरोप है। तीन सदस्यीय टीम ने सहारनपुर में चार बड़े संस्थानों की जांच की। इसमें लगभग 400 छात्र-छात्राएं हैं। जांच के दायरे में लगभग एक दर्जन संस्थान हैं और लगभग एक हजार छात्र-छात्राएं विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ ले रहे हैं।
टीम ने फैकल्टी में जांच करने के अलावा छात्र-छात्राओं से पूछताछ की और कई छात्रों से फोन पर बात की और उनसे छात्रवृत्ति के बारे में पूछा था। टीम बड़े संस्थानों से आवश्यक प्रपत्र लेकर आई थी। जिन संस्थानों के छात्रों को भुगतान किया गया है उनका ऑनलाइन वेरिफिकेशन हुआ था।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जांच में सौ करोड़ के घोटाले संबंधी साक्ष्य नहीं मिले हैं। एक जांच अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सहारनपुर में विभिन्न संस्थानों से वसूली करने वाला गिरोह सक्रिय है। वसूली की रकम न मिलने पर संस्थानों को शिकायत करने की धमकी दी जाती है। घोटाले संबंधी कोई भी साक्ष्य नहीं मिले हैं।