माध्यमिक शिक्षा के सरप्लस और असंगत विषयों के शिक्षकों की तीन दिवसीय काउंसलिंग के दूसरे दिन शनिवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में सामान्य के 219 शिक्षकों की काउंसलिंग कर उन्हें अन्य स्कूलों में समायोजित किया गया।
इस दौरान दोपहर में कई शिक्षकों ने काउंसलिंग प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए नारेबाजी की। इससे कई घंटे तक काउंसलिंग प्रक्रिया बाधित रही। बाद में राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष करनैल सिंह ने अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा (कुमाऊं) सुषमा सिंह से बातचीत कर शिक्षकों के हितों की अनदेखी होने पर इसका विरोध करने की धमकी दी।
बताते चलें कि डायट परिसर में शुक्रवार से असंगत और सरप्लस शिक्षकों की काउंसलिंग प्रक्रिया चल रही है। शनिवार को सामान्य के 219 शिक्षकों की काउंसलिंग हुई। शिक्षकों का कहना था कि वर्षों से विद्यालय में कार्यरत सीनियर शिक्षक के बजाय जूनियर शिक्षक को सरप्लस माना जाना चाहिए।
कुछ शिक्षकों ने कहा कि सालों से सुगम में तैनात शिक्षकों को काउंसलिंग के बाद भी सुगम स्कूल में और दुर्गम में तैनात शिक्षकों को दुर्गम में ही भेजा जा रहा है, जो गलत है। राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष करनैल सिंह के डायट पहुंचते ही शिक्षकों ने काउंसलिंग प्रक्रिया बंद करो कहते हुए नारेबाजी शुरू कर दी।
बाद में अध्यक्ष समेत मंडलीय मंत्री सोहन सिंह मेहता, मंडल अध्यक्ष राजेंद्र सिंह बोरा ने सुषमा सिंह से बातचीत की। उन्होंने समायोजन से पूर्व यूपी के विकल्पधारी शिक्षकों को वापस भेजने, पदोन्नति प्रक्रिया पूरी कराने, समायोजन से पूर्व अनिवार्य और अनुरोध के आधार पर स्थानांतरण कराने, ब्लाक रिसोर्स पर्सन और न्याय पंचायत रिसोर्स पर्सन की नियुक्ति कराने आदि की मांग की। इस संबंध में उन्होंने ज्ञापन भी सौंपा।
संघ के मंडलीय मंत्री सोहन सिंह मेहता ने समायोजन के लिए बनाए गए नियमों को गलत बताते हुए इसका विरोध किया। सुषमा सिंह कहा कि शिक्षकों की समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। वार्ता के बाद काउंसलिंग शुरू कर दी गई। इस दौरान सीमैट के अपर निदेशक षष्ठी बल्लभ जोशी समेत कई अधिकारी मौजूद थे। खबर लिखे जाने तक डायट में काउंसलिंग प्रक्रिया जारी थी।