कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने केंद्र सरकार पर उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन थोपे जाने का आरोप लगाते हुए इस मामले में जनता के बीच जाने का एलान किया है।
उन्होंने बताया कि पार्टी 10 अप्रैल से राज्य में विभिन्न स्थानों से मशाल जुलूस आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने भाजपा पर उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाकर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप जड़ा। उपाध्याय ने कहा कि कांग्रेस उत्तराखंड में चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है।
शनिवार को गढ़वाल दौरे से लौटते हुए ऋषिकेश प्रेस क्लब आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने उत्तराखंड में हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और कांग्रेस सरकार को हटाकर राष्ट्रपति शासन लागू करने को लोकतांत्रिक व्यवस्था के विरुद्ध कार्रवाई करार दिया।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की मनमानी के खिलाफ पार्टी 10 अप्रैल से लोकतंत्र बचाओ, उत्तराखंड बचाओ आंदोलन शुरू करेगी। जो ब्लॉक स्तर पर आयोजित किया जाएगा। इसके तहत पार्टी के बड़े नेता स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, पहाड़ के सामाजिक सरोकारों से जुड़ी विभूतियों, राज्य आंदोलन से जुड़े बड़े हस्तियों की जन्म स्थली से मशाल जुलूस की शुरुआत कर आंदोलन का विगुल फूंकेंगे।
18 अप्रैल को मशाल जुलूस आंदोलन के तहत देहरादून में केंद्र सरकार के गैर भाजपाई सरकारों के साथ किए जा रहे बर्ताव के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने राज्य आंदोलन के ध्वज वाहकों से भी सांप्रदायिक और राज्य विरोधी ताकतों के खिलाफ आगे आने का आह्वान किया।
उपाध्याय ने आरोप लगाया कि सत्ता पाने के लिए जो षड्यंत्र भाजपा ने किया है, एक समय में राज्य में 27 विधायकों की स्थिति में भी कांग्रेस ने नहीं किया।
‘वह ईमानदार होते तो देते इस्तीफा’
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि प्रदेश सरकार को गिराने के लिए विधायकों की बोली लगाई गई है और विधायक बिके हैं। उन्होंने विधायकों के बिकने की घटना को देवभूमि को कलंकित करने वाला करार दिया। उनका कहना है कि कांग्रेस के बागी विधायकों के पास कोई मुद्दा नहीं था।
बगावत के बाबत बागियों के तर्कों के जवाब में उन्होंने कहा कि अपराधी अपने बचाव का रास्ता पहले ढूंढ लेते हैं। उन्होंने कहा कि बागी विधायक यदि ईमानदार होते तो इस्तीफा देते, भाजपा की गोद में नहीं बैठते।
बकौल प्रदेश अध्यक्ष महीने भर पहले विजय बहुगुणा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले थे। उनकी ओर से रखे गए बिंदुओं पर पार्टी अध्यक्ष के निर्देश पर एक कमेटी बनी थी, जिसके वह स्वयं संयोजक हैं और प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी अध्यक्ष हैं। कमेटी की एक बैठक हो चुकी है, जिसमें बहुगुणा और उनके साथी विधायकों द्वारा उठाए गए 2-3 बिंदुओं पर चर्चा के उपरांत निर्णय लिया गया था।
इनमें कुछ एक विधायकों को मंत्री बनाने सहित कुछ और मसले थे। जिन पर विधानसभा सत्र संपन्न होने के बाद कार्रवाई की बात हो चुकी थी। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि इस तमाम मामले के पीछे अति महत्वाकांक्षा और पैसा सबसे बड़ा कारण रहा है।