जहां आदमी सोता है वहीं आवासीय भवन होता है। रसोई, बरामदा, आंगन, स्टोर और शौचालय आवासीय भवन की श्रेणी में नहीं आते हैं। अगर ये आपदा में क्षतिग्रस्त हुए हैं तो इनका मुआवजा नहीं मिलेगा। यह कहना है तहसील प्रशासन का।
16 जून को अलकनंदा के जलस्तर में अचानक हुई वृद्धि से शक्तिविहार और लोअर भक्तियाना के लगभग 80 आवासीय मकान जलमग्न हो गए थे। इन 80 आवासीय भवनों में रहने वाले लोगों का सारा सामान अलकनंदा की बाढ़ की भेंट चढ़ गया था। इन लोगों के पास एक कपड़े जोड़ी के अलावा कुछ भी नहीं रह गया।
पूर्णरूप से जलमग्न हुए आवासीय भवन मालिकों को प्रशासन ने एक लाख की फौरी राहत राशि देकर अपना पल्ला छुड़ा लिया, लेकिन जिन भवन मालिकों का आंगन, बरामदा, स्टोर या फिर रसोई क्षतिग्रस्त हुआ है। उनके लिए प्रशासन के पास राहत राशि नहीं है।
प्रशासन का कहना है कि जहां आदमी सोता है वही भवन होता है। ये सब आवासीय भवन में नहीं आता। मुआवजा केवल आवासीय भवनों के क्षतिग्रस्त होने पर ही मिलता है।
पुस्ता भी धंस गया
हमारी रसोई, स्टोर और बरामदे में दरारें पड़ गई हैं। आंगन का पुस्ता भी पानी भरने से धंस गया है, लेकिन तहसील प्रशासन कहता है कि यह सब आवासीय भवन में नहीं आता। तुम्हें मुआवजा नहीं मिलेगा। जहां आदमी सोता है वही भवन होता है।
ऊषा शर्मा, निवासी शक्ति विहार।
आंगन के लिए मुआवजा नहीं
यदि किचन और शौचालय आवासीय भवन से अलग हैं तो वे मुआवजे की जद में नहीं आते। यदि किचन और शौचालय मकान के अंदर हैं तो उन्हें मुआवजा मिलेगा। आंगन के लिए मुआवजे का प्रावधान नहीं है।
हरिमोहन खंडूरी, नायब तहसीलदार, श्रीनगर।