उत्तराखंड के भटवाड़ी में फंसे यात्रियों को निकालने तथा राहत पहुंचाने के नाम पर हैलीकाप्टर की सैकड़ों उड़ान के बावजूद इस क्षेत्र में आज भी अकाल की स्थिति बनी हुई है।
अधिकारी सभी गांवों में राशन पहुंचाने के दावे तो कर रहे हैं, किंतु जमीनी हकीकत कुछ और ही है। आपदा के 35 दिन बाद भी लाटा, कुमाल्टी, गैरी में क्लोरीन की गोली व मेडिकल सहायता के नाम पर कुछ दवाईयां तो जरूर मिली, किंतु राहत के सरकारी राशन के नाम पर अभी तक गेंहू, चावल का एक दाना भी नहीं मिला।
इन गांवों में किसी एनजीओ की मदद भी नहीं पहुंची। जबकि यह गांव तहसील मुख्यालय भटवाड़ी से 6 किमी की दूरी पर है। ग्राम प्रधान अवतारी देवी व ग्रामीण मदन सिंह, अजयपाल, डा. मनोज पंवार बताते हैं कि गांव वाले गंगोत्री हाईवे के कई हिस्से आपदा की चपेट में आने के कारण जंगल से बने बाईपास रास्तों से 36 किलोमीटर की दूरी तय उत्तरकाशी से सामान ला रहे हैं।
लाटा गांव के कई बुजुर्ग, निराश्रित, बीमार लोग, जिनके घर में जवान पुरूष नहीं है वे राशन, चीनी, चायपत्ती, साबुन, तेल, मसाले आदि जरूरी सामान के लिए उत्तरकाशी नहीं जा पा रहे हैं।
सालंग गांव के कांग्रेस सेवादल के जिला मुख्य संगठक गोपाल सिंह कहते हैं कि उनके गांव के 125 परिवारों को 15 किलो गेंहू तो मिला, किंतु चावल नहीं मिले। यही स्थिति सौरा गांव की है।
यहां गांव में दो रिटेलरों में से एक रिटेलर की ही राशन गांव में पहुंची, जिस कारण आधे गांव में अभी सरकारी राहत का गेंहू-चावल नहीं पहुंच पाया। गांव के राजेंद्र लाल, बचनलाल, प्रताप सिंह आदि एक दर्जन नौजवानों की टोली सामान लेने उत्तरकाशी जा रहे हैं।
रैथल के बृजपाल राणा बताते हैं कि उनके 400 परिवारों के बड़े गांव में सरकारी राशन के नाम पर हैलीकाप्टर से बासमत्ती चावल छपे 29 बैग ही पहुंचे। रिटेलर इसे बांटे तो बांटे कैसे। बासमती के नाम पर कट्टों में चावल के बौरे भरे हुए हैं। यही स्थिति क्षेत्र के दर्जनों दुर्गम गांवों की है।
हकीकत यह है कि भटवाडी खाद्यान्न गोदाम से जुड़े 26 रिटेलर हैं, किंतु 8 को छोड़कर शेष गांव के रिटेलरों को राशन मिला ही नहीं, जबकि किसी को आधा राशन ही मिल पाया। जहां राहत का गेंहू बंटा, वहां चक्कियां डीजल न मिलने के कारण बंद पड़ी हुई।
दस दिन में ही खत्म हो गई राशन
उनकी राशन घर में थैलों में बंद पड़ी है। राशन के कोटे की चीनी दो माह से नहीं पहुंची। भटवाड़ी बाजार की स्थिति यह है कि जून में समय से पहले आई आसमानी आफत के कारण व्यपारियों को राशन आदि दैनिक उपयोग की वस्तुओं का स्टॉक जमा करने का मौका ही नहीं मिल पाया।
दुकान में उपलब्ध राशन, चीनी, चायपत्ती आदि जरूरी सामान दस दिन में ही खत्म हो गया। यहां तक कि चीनी के विकल्प के रूप में लोग मिश्री, बूरा, गुड, लैंचीदाना, ताशी तक उठा रहे हैं।