नाम-भगत सिंह भंडारी। उम्र-38 साल। नोएडा की प्राइवेट कंपनी में करते हैं नौकरी। मंगलवार सुबह अचानक दिल का दौरा पड़ा और अस्पताल लाने तक मौत उनकी मौत हो गई।
नाते-रिश्तेदारों को खबर मिली तो अंतिम संस्कार की तैयारियां तक पूरी कर ली गईं पर 21 घंटे मरकर भगत फिर जिंदा हो गए। उनकी सांसें चल पड़ीं।
जिस दिल में अटैक पड़ा था वह धड़कने लगा तो उन्हें दोबारा अस्पताल भर्ती करा दिया गया। अब वह स्वस्थ हैं और इस अजब वाकये से परिजन खुश।
कोई रील नहीं, रीयल स्टोरी है
उत्तराखंड के नैनीताल के ग्राम लछमपुर ठेरी के भगत सिंह नोएडा में प्राइवेट कांटा वाट (इलेक्ट्रानिक कांटा) कंपनी में नौकरी करते हैं। मंगलवार दोपहर करीब पौने 12 बजे उन्हें कंपनी के कार्यालय में हार्टअटैक पड़ा।
जिसे देख कंपनी की ओर से नोएडा के नजदीकी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। डाक्टरों के सामने ही भगत को दूसरा अटैक पड़ गया और सांसें रुक गई।
नब्ज चेक करने के बाद डाक्टरों ने भगत को मृत घोषित कर दिया और बुधवार तक अस्पताल की सारी जरूरी कार्रवाई पूरी करवाने को कहा। कंपनी ने उनके रिश्तेदारों को भी उनकी मौत की सूचना दे दी।
अस्पताल पहुंचे रिश्तेदारों ने इसकी सूचना रामनगर में उनके परिजनों को दी। उनसे अंतिम संस्कार की तैयारी करने को कहा गया पर बुधवार सुबह ठीक नौ बजे अचानक भगत की सांसें चलने लगीं।
इधर, रामनगर में अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। सारा सामान खरीद लिया गया। रिश्तेदार और गांव के लोग शोक संवेदना देने घर पहुंचने लगे, तभी उन्हें सूचना मिली कि भगत जिंदा हो गया है।
खबर सुनकर सब चौंक पड़े। नोएडा के लिए रवाना हुई पत्नी भी पति के जिंदा होने की खबर सुन आधे रास्ते से लौट आई। नोएडा से रिश्तेदारों ने फोन पर बताया कि अब भगत की हालत में काफी सुधार है।
पिछले जन्म में शायद किए होंगे पुण्य
भगत सिंह भंडारी की पत्नी मुन्नी भंडारी का कहना है कि उसे भगवान पर पूरा भरोसा था। आशा वर्कर मुन्नी ने बताया कि उनका दूसरा जन्म भी उसके लिए ही हुआ है।