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फिर से लौटेगा लिकर किंग पोंटी चड्ढा का 'युग'

Tue, 10 Sep 2013 12:25 PM IST
अमर उजाला, हल्द्वानी
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18 साल पूर्व यूपी की तत्कालीन सरकार ने हल्द्वानी में नदियों से खनन कराने का ठेका लिकर किंग पोंटी चड्ढा को दिया था। तब हल्द्वानी और शांतिपुरी क्षेत्र में गैंगवार को बढ़ावा मिला था।
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बंदूकों के बल पर नदियों से खनन होता था। वही नीति प्रदेश सरकार फिर अपनाने जा रही है। खनन का निजीकरण हुआ तो जड़ से हल्द्वानी से मिट चुके गैंगवार को फिर बढ़ावा मिलेगा और माफियाराज सक्रिय हो जाएगा।

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प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार 15 मई 1995 में यूपी की तत्कालीन सरकार ने पोंटी चड्ढा को यहां की नदियों से खनन कराने का ठेका दिया था। पोंटी को खनन की अनुमति करीब पांच साल के लिए दी गई थी। उस वक्त उत्तराखंड यूपी का हिस्सा था।
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इधर, शहर के कई पुराने राजनीतिज्ञों का कहना है कि खनन कार्य निजी हाथों में सौंपने का मतलब गैंगवार को बढ़ावा देना है। उस वक्त हल्द्वानी और शांतिपुरी इलाकों में खनन को लेकर गुटों के बीच हुए गैंगवार में 12 से ज्यादा लोगों की जान गई थी।

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हल्द्वानी से शांतिपुरी (पंतनगर) तक जिप्सियों में भरे लोगों के हाथों में बंदूकें ही दिखाई देती थीं। इस बार खनन निजी हाथों में गया तो अब स्थिति पहले से ज्यादा भयानक होगी। शहर के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि 1995 में वह राजनीति में सक्रिय नहीं थे, लेकिन उनके बड़े भाई ने उस गुंडागर्दी को करीब से देखा था। उन्हें इतना याद है कि खनन बंदूकों के बल पर होता था। चारों तरफ बंदूकें और जिप्सियां नजर आती थीं।

पोंटी को ठेके पर दिए खनन के कागजात मंगाए
उत्तराखंड में खनन निजी हाथों में सौंपने की तैयारी शासन स्तर पर जोरशोर से चल रही है। 18 साल पूर्व यूपी की तत्कालीन सरकार द्वारा लिकर किंग पोंटी चड्डा को उत्तराखंड की नदियों से खनन करने का ठेका दिया गया था।

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पोंटी को ठेका किस प्रावधानों के तहत दिया गया, उस प्रावधान पर कांग्रेस सरकार भी खनन देने की तैयारी में है। नैनीताल जिले समेत जिन जिलों में पोंटी चड्ढा ने खनन कराया था, उन जिलों के दफ्तरों से खनन के पुराने दस्तावेज शासन ने मंगा लिए गए हैं।

माफियाराज हो जाएगा हावी
जिले के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि खनन निजी हाथों में सौंपने से यहां माफिया हावी हो जाएंगे। 1990 के दशक में लकड़ी तस्करी से माफियाराज शुरू हुआ।

1995 में खनन निजी हाथों में जाने से गैंगवार को जन्म मिला। कई हत्याएं हुई लेकिन 2000 के बाद एनकाउंटर होने से माफियाराज की कमर टूटी। अब खनन दोबारा से निजी हाथों में गया तो क्राइम बढ़ना स्वाभाविक है।
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