उत्तराखंड में बदरीनाथ धाम के ऊपर सतोपंथ सरोवर के पास अलकनंदा नदी के मुहाने पर बनी झील से अलकनंदा नदी में पानी रिस रहा है।
विशेषज्ञ झील के ब्लॉकेज पर नजर रख रहे हैं। फिलहाल इससे भले ही कोई खतरा नहीं हो लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक बदरी-केदार क्षेत्र में संभावित लैंड स्लाइड और भूकंप का मेल बड़ी दिक्कत खड़ी कर सकता है।
बदरी-केदार घाटी में ही 992 नए लैंड स्लाइड जोन चिह्नित किए गए हैं। बदरीनाथ के ऊपर नई बनी झील के ऊपर तक लैंड स्लाइड संभावित क्षेत्र है। ऐसे में इस क्षेत्र में हल्का भूकंप भी बड़ी तबाही की वजह बन सकता है।
बीते बृहस्पतिवार की रात ऊखीमठ में आए भूकंप ने चिंता और बढ़ा दी है। इसकी तीव्रता बेशक कम थी। अगर इस क्षेत्र में 4.5 के मैग्नीट्यूड से अधिक का भूकंप आए और उसके केंद्र की गहराई 10 किलोमीटर हो तो स्थिति चिंताजनक हो सकती है।
वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्था के विशेषज्ञ भी बताते हैं कि भूकंप नए लैंड स्लाइड जोन की रचना कर रहे हैं। गौरतलब है कि झील बनने की सूचना पर जिला प्रशासन ने तकनीकी अधिकारियों की टीम सतोपंथ तक भेजने की बात कही थी, लेकिन शुक्रवार को टीम नहीं पहुंची।
उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के निदेशक डॉ. एमएम किमोठी के मुताबिक सेटेलाइट मैप के अध्ययन से सामने आ रहा है कि झील पूरी तरह बंद नहीं हुई है। ब्लॉकेज पर भी नजर रखी जा रही है कि कहीं वह बढ़ तो नहीं रहा।
सर्वाधिक लैंड स्लाइड जोन:-
केदारनाथ, सोनप्रयाग, गौरीकुंड, ऊखीमठ, गुप्तकाशी, फाटा।