केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे भीषण त्रासदी के बाद बचाव और राहत कार्य में लगी केंद्रीय एजेंसियों और राज्य सरकार के बीच तालमेल की कमी की बात कही।
केस-एक
शिंदे ने सभी एजेंसियों और राज्य सरकार के बीच तालमेल के लिए पूर्व केंद्रीय गृह सचिव वीके दुग्गल को तैनात किया तो कुछ समय बाद ही मुख्य सचिव ने राज्य के वरिष्ठ आईएएस उमाकांत पवार को वायुसेना और शासन के बीच तालमेल के लिए नोडल अफसर बना दिया।
केस-दो
शिंदे ने शनिवार को बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि अब भी 30 हजार लोग पहाड़ पर विभिन्न स्थानों पर फंसे हैं। कुछ घंटे बाद ही मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस की और बताया कि कहा कि 22 हजार लोगों को निकाला जाना बाकी है।
केस-तीन
शिंदे की बैठक में एयर फोर्स और आर्मी के बीच समन्वय न होने का भी खुलासा हुआ। एयरफोर्स ने कहा कि उसके हेलीकॉप्टरों को ईंधन नहीं मिल रहा है।
कई बार तो उड़ान भरने में भी दिक्कतें आ रही है। सेना ने एयरफोर्स की इन बातों ने पूरी तरह से नाइत्तफाकी जताई। जाहिर है कि दोनों सेनाओं के बीच तालमेल नहीं बन पा रहा है।
केस-चार
रेस्क्यू आपरेशन में लगी सेना, वायुसेना, आईटीबीपी और एनडीआरएफ के साथ राज्य सरकार का तालमेल नहीं बन पाया। लोगों को अपलिफ्ट करने और रसद पहुंचाने के लिए लोकल स्थानों पर जाना था।
शुरू के दो रोज सभी एजेंसियों और सिविल प्रशासन बचाव और राहत अभियान ने अपनी समझ से अपनी दम पर ही चलाया। तीसरे दिन हालात कुछ सुधरे।
लेकिन तालमेल अब तक पूरी तरह नहीं बन पाया। नतीजा यह है कि रेस्क्यू किए जा रहे प्रभावितों के बारे में सही सूचनाएं न मिलने से उनके परिजन परेशान घूम रहे हैं।
केस- पांच
सोलह तारीख को आसमान से बरसी आफत के बारे में मौसम विभाग ने पहले ही अलर्ट जारी कर दिया था।
तालमेल की कमी से राज्य सरकार ने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और तीर्थयात्रा सामान्य तरीके से चलती रही। नतीजा जानमाल की भारी तबाही के रूप में सामने आया।
जाहिर है कि इस कमी का खामियाजा आपदा प्रभावितों को ही उठाना पड़ रहा है। शिंदे ने अब सभी के बीच समन्वय बनाने का जिम्मा पूर्व केंद्रीय गृह सचिव वीके दुग्गल को दिया है।
दुग्गल सोमवार से अपना काम शुरू करेंगे।