कोटद्वार। लंबे समय से बदहाल पड़े मालन डायवर्जन वैकल्पिक मार्ग पर आखिरकार पानी का छिड़काव होने से राहगीरों को कुछ राहत मिली। मालन नदी का पुल टूटने के बाद बने वैकल्पिक मार्ग पर धूल का गुबार उठने से राहगीरों को आवागमन में परेशानी के साथ साथ सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी। जिससे कभी भी दुर्घटना होने का डर बना हुआ था।बीते वर्ष जुलाई माह में मालन नदी पर बना पुल टूटने के बाद से लोनिवि ने तल्ला मोटाढाक से हल्दूखाता के बीच नदी में ह्यूमपाइप डालकर कॉजवे बनाया था। वैकल्पिक मार्ग मवाकोट से कण्वाश्रम होते हुए भी तैयार करवाया गया, लेकिन कॉजवे मार्ग अपेक्षाकृत नजदीक व सुविधाजनक होने से इसका ज्यादा प्रयोग किया जाता है। इसी मार्ग से सिडकुल के जशोधरपुर और सिगड्डी के उद्योगों के वाहनों की आवाजाही भी होती है। मार्ग पर गड्ढों से बचकर निकलना खासा मुश्किल हो गया था। दरअसल मार्ग से कोई भी वाहन गुजरने पर उठने वाले धूल के गुबार से कुछ भी देख पाना संभव नहीं हो पा रहा था और घटनाएं हो रही थीं।
अमर उजाला ने इस समस्या को 13 अक्तूबर के अंक में मालन डायवर्जन वैकल्पिक मार्ग में गड्ढे व धूल के गुबार से परेशानी शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया। बताया गया था कि करीब 50 हजार की सघन आबादी वाले क्षेत्र के लोग इस मार्ग से गुजरते हैं। धूल का गुबार कभी भी किसी बड़ी घटना का कारण बन सकता है। लोक निर्माण विभाग दुगड्डा के अधिशासी अभियंता निर्भय सिंह ने वैकल्पिक मार्ग पर पानी का छिड़काव कराने का आश्वासन दिया था। रविवार को ही मार्ग पर टैंकर लगाकर पानी का छिड़काव किया गया। जिससे राहगीरों ने राहत की सांस ली।