सरकारी शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए विभाग की मॉडल स्कूल योजना नए शिक्षा सत्र की शुरूआत में परवान चढ़ती नजर नहीं आ रही है। जहां शहर क्षेत्र के निजी विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है वहीं सरकारी मॉडल स्कूल छात्रों की राह तकते रह गए हैं।
खिर्सू विकास खंड के चयनित पांच मॉडल स्कूलों में जीआईसी श्रीनगर, जीआईसी खिर्सू, राजकीय जूनियर हाईस्कूल चमराणा व राजकीय प्राथमिक विद्यालय श्रीकोट तथा खंडाह शामिल हैं। ये सभी विद्यालय श्रीनगर शहर से 15 किमी के दायरे में हैं। जहां एक ओर शहर के निजी विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अभिभावक अपने बच्चों को प्रवेश के लिए हाथ पैर मार रहे हैं, वहीं सरकारी मॉडल स्कूल प्रवेश के लिए छात्रों की राह ताक रहे हैं। संकुल प्रभारी मुकेश काला ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय खंडाह में अब तक कक्षा एक में एक भी प्रवेश नहीं हुआ है। श्रीकोट प्राथमिक विद्यालय व जूनियर हाईस्कूल चमराणा में मात्र छह-छह प्रवेश हुए हैं। जीआईसी श्रीनगर व जीआईसी खिर्सू बोर्ड में परीक्षा केंद्र होने से यहां प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
रंग-रोगन तक ही सीमित रहे मॉडल स्कूल
श्रीनगर। बेहतर व्यवस्थाओं के नाम पर मॉडल स्कूल केवल रंग-रोगन कराने तक ही सीमित रहे। राजकीय प्राथमिक मॉडल स्कूलों में मानकों के अनुसार प्रधानाध्यापक व व्यायाम शिक्षक सहित पांच अध्यापक तैनात होने हैं। जबकि श्रीकोट में तीन व खंडाह में मात्र दो ही शिक्षक तैनात हैं। इन विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी तैनात नहीं किए गए हैं। साथ ही विद्यालयों में फर्नीचर व पाठ्य सामग्री भी उपलब्ध नहीं हैं।
शिक्षण माध्यम को लेकर भी असमंजस
श्रीनगर। मॉडल स्कूलों में शिक्षण के माध्यम को लेकर अभिभावक असमंजस में हैं। अभिभावक दिनेश रावत का कहना है कि उनके घर के बगल में ही प्राथमिक मॉडल स्कूल है। विद्यालय की ओर से उन्हें यह स्पष्ट नहीं कराया जा रहा है कि पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी होगा या हिंदी। इसलिए उन्हें अपने बच्चे का प्रवेश मजबूरन निजी विद्यालय में कराना पड़ा।
उद्घाटन की बाट भी जोह रहे हैं
श्रीनगर। जनप्रतिनिधियों की ओर से वर्तमान शिक्षा सत्र के शुरूआत में इन मॉडल स्कूलों का उद्घाटन किया जाना था। राज्य में राजनीतिक उथल-पुथल व राष्ट्रपति शासन के चलते ये स्कूल उद्घाटन को लेकर भी असमंजस में हैं।
मानकों के अनुरूप नहीं हुई शिक्षकों की तैनाती
देवाल। ब्लॉक में शिक्षा विभाग ने मॉडल स्कूलों की स्थापना तो कर दी है, लेकिन मानकों के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती नहीं होने से छात्र- छात्राओं और अभिभावकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
अभिभावकों भैरव दत्त ओर गोविंद सिंह ने बताया कि निवर्तमान राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों मे घटती छात्र संख्या को देखते हुए प्राथमिक स्कूल देवाल, खेता और जूनियर हाईस्कूल सूया, जीआईसी मुंदोली तथा बोरागाड को मॉडल स्कूल बनाया है। इन स्कूलों में बच्चों को कंप्यूटर सहित अन्य सुविधाएं मुहैया होनी थी, लेकिन इन विद्यालयों में शिक्षकों की व्यवस्था तक नहीं हो पाई है। ऐसे में अभिभावकों में अपने पाल्यों की चिंता सताने लगी है। खंड शिक्षा अधिकारी बीसी मिश्रा ने बताया कि शीघ्र ही विद्यालयों में पांच अध्यापकों की तैनाती कर दी जाएगी।