डा. रमेश पोखरियाल निशंक के केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से हटने के बाद कोटद्वार भाबर में प्रस्तावित केंद्रीय विद्यालय खुलने की उम्मीद दम तोड़ रही है। चुनावी वर्ष में भी केंद्रीय विद्यालय की फाइल केंद्र में धूल फांक रही है।
करीब दो लाख की आबादी वाले कोटद्वार क्षेत्र की साठ फीसदी से अधिक आबादी सैन्य पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखती है। गढ़वाल के गांवों से बड़ी संख्या में लोग बच्चों की बेहतर पढ़ाई के खातिर पलायन कर यहां बस गए हैं, जिसमें पूर्व सैनिक और सेवारत सैनिकों के परिवार भी शामिल हैं। इसके बावजूद क्षेत्र में केंद्रीय विद्यालय का न होना उन सैनिक परिवारों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है, जिन्हें अपने पाल्यों को शिक्षित करने के लिए क्षेत्र में खुले निजी शिक्षण संस्थानों में भर्ती कराना पड़ता है। निजी संस्थानों में भारी भरकम फीस, दूसरे चार्ज और मनमानी उन्हें परेशान कर रही हैं। जिसे देखते हुए क्षेत्र के पूर्व सैनिक पिछले एक दशक से कोटद्वार में केंद्रीय विद्यालय खोलने की मांग उठाते आ रहे हैं।
वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा ने भाबर में केंद्रीय विद्यालय खोलने की मांग को अपने घोषणा पत्र में शामिल किया था। चुनावी साल में भी केंद्रीय विद्यालय खोलने की अनुमति नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है।
- सीपी डोबरियाल वरिष्ठ उपाध्यक्ष, पूर्व सैनिक सेवा परिषद।
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भाबर में केवि खोलने की सभी औपचारिकताएं पूर्ण हो चुकी हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इसे जल्द हरी झंडी मिल जाएगी। देश में 40 नए केंद्रीय विद्यालयों में उत्तराखंड के तीन केंद्रीय विद्यालय शामिल हैं। जल्द ही वह नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस मामले में मिलेंगे।
- डॉ. हरक सिंह रावत, क्षेत्रीय विधायक व वन मंत्री उत्तराखंड।