टिकट नहीं मिलने से क्षुब्ध भाजपा के पूर्व विधायक शैलेंद्र सिंह रावत ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को भेजे इस्तीफे में उन्होंने आला नेताओं पर साजिश के तहत उनकी राजनीतिक हत्या करने का आरोप लगाया। शैलेंद्र के इस्तीफे के बाद उनके कांग्रेस में शामिल होने की प्रबल संभावनाएं हो गई है।
सूत्रों की मानें तो वह कांग्रेस के टिकट पर यमकेश्वर या चौबट्टाखाल से भाजपा के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। बृहस्पतिवार शाम को पूर्व विधायक शैलेंद्र सिंह रावत ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट को अपना इस्तीफा भेजा। इस्तीफा भेजने के तुरंत बाद उन्होंने इसे सार्वजनिक कर दिया। यहां जारी बयान में उन्होंने पार्टी के आला नेताओं पर उनके साथ राजनीतिक साजिश करने का आरोप लगाया।
कहा कि राजनीति में उनकी शुरुआत भाजपा से हुई। उन्होंने दिन-रात एक करके पार्टी को मजबूत स्थिति में लाकर 2007 में कोटद्वार विधानसभा सीट पर जीत दर्ज कराई। वर्ष 2012 में बिना उन्हें विश्वास में लिए बगैर टिकट काट दिया गया था। बावजूद इसके उन्होंने पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी के लिए तन-मन और धन से चुनाव प्रचार किया।
हार का ठीकरा उनके सिर पर फोड़कर पार्टी ने उन्हें छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया। तब भी उन्होंने पार्टी के लिए काम किया। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपने स्वार्थों की खातिर निष्कासन वापस ले लिया और चुनाव में उनका राजनीतिक इस्तेमाल किया गया। इन परिस्थितियों में भी उन्होंने पूरे मनोयोग से पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी के लिए कार्य करते हुए उन्हें भारी मतों से बढ़त दिलाई।
पूर्व विधायक शैलेंद्र रावत ने आरोप लगाया कि वर्तमान चुनाव में भाजपा ने कोटद्वार सीट से उनका टिकट काटकर उनकी राजनीतिक हत्या की है। कहा कि उनके चरित्र पर आज तक न कोई दाग नहीं है फिर भी भाजपा ने लगातार दो चुनाव में राजनीतिक साजिश के तहत उनके साथ अन्याय किया। जिससे क्षुब्ध होकर उन्हें भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
पार्टी अध्यक्ष को लिखे पत्र में शैलेंद्र ने कहा कि टिकट बंटवारे में जिस तरह परिवारवाद और दूसरे दलों से आए भ्रष्ट नेताओं को तरजीह दी गई, उससे पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं को गहरी चोट पहुंची है। पार्टी के लिए अब विचारधारा का कोई महत्व नहीं रह गया है।