गर्मी बढ़ते ही द्वारीखाल ब्लॉक के दाबड़ और खंड गांव में पेयजल संकट गहरा गया है। पेयजल योजना का स्रोत सूखने के कारण ग्रामीणों में पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से गांवों की पेयजल लाइन को दूसरे जलस्रोत से जोड़ने की मांग की है।
वर्ष 1985 में जलसंस्थान कोटद्वार की ओर से दाबड़-खंड पेयजल योजना बनाई गई थी। करीब सात साल से स्रोत पर पानी कम होने से खासकर गर्मियों में दोनों गांवों में पेयजल संकट हो जाता है। स्थानीय ग्रामीणों की ओर से जल संस्थान कोटद्वार को उक्त योजना को दूसरे स्रोत से जोड़ने के लिए कई बार प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन जल संस्थान के अधिकारियों ने प्रस्तावों को गंभीरता से नहीं लिया। इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
ग्राम प्रधान दाबड़ राखी राणा व पूर्व प्रधान कांडी पीतांबर दत्त बड़थ्वाल ने जलसंस्थान पर गांव की उपेक्षा का आरोप लगाया। कहा कि यदि जल संस्थान की ओर से उक्त पेयजल लाइन को दूसरे स्रोत से जोड़ दिया जाता है तो काफी हद तक पेयजल संकट से राहत मिल जाएगी। उक्त पेयजल योजना को जिस स्रोत से जोड़ने की बात कही जा रही है, वह गडमोला गांव की सरहद में है।
इसमें जिला प्रशासन के प्रतिनिधि की मध्यस्थता में बैठक कर दूसरे स्रोत से पेयजल योजना को जोड़ने पर विचार हो सकता है। इसमें जल संस्थान कोटद्वार के अधिकारियों को पहल करनी चाहिए। कई बार द्वारीखाल में बीडीसी की बैठक में दाबड़-खंड पेयजल योजना को दूसरे से स्रोत से जोड़ने की बात बैठक में उठाई गई, लेकिन जल संस्थान कोटद्वार की ओर से आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उधर, जलसंस्थान के जेई टीएस गुसाईं ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा पेयजल योजना के स्रोत का कुछ हिस्सा सीमेंटेट कर दिया गया है। इसके कारण पानी कम हो गया है। मौके पर जाकर समस्या के समाधान के लिए उपाय किए जाएंगे।