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थर्टी फर्स्ट और नए साल के जश्न पर लैंसडौन और केटीआर में अलर्ट

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लैंसडौन वन प्रभाग और कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग (केटीआर) में वन सीमा से सटे क्षेत्रों में थर्टी फर्स्ट और नए साल के जश्न मनाने वालों पर वन विभाग की पैनी निगाह रहेगी। वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के चलते लैंसडौन से लेकर कार्बेट टाइगर रिजर्व के जंगलों में अलर्ट घोषित किया गया है। उत्तर प्रदेश से सटी सीटीआर की दक्षिणी सीमा को सील कर दिया गया है और यहां पर खासी सतर्कता बरती जा रही है। बिना इजाजत के वन क्षेत्र और वन मार्गों पर आवाजाही करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
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कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) और राजाजी नेशनल पार्क के बीच के लैंसडौन वन प्रभाग के लालढांग, कोटद्वार और कोटड़ी रेंज में भी अलर्ट घोषित किया गया है। लैंसडौन वन प्रभाग के प्रभारी डीएफओ अमरेश कुमार ने बताया कि लैंसडौन भूमि संरक्षण वन प्रभाग और लैंसडौन वन प्रभाग की संयुक्त गश्त शुरू कराई गई है। अधिकारी भी गश्त पर रहेंगे। लैंसडौन के बंगलों में केवल अधिकारी ही ठहरेंगे।
उधर, नए साल के जश्न के बीच वन्यजीव से जुड़े अपराध की आशंका में वन अधिकारियों ने सीटीआर में भी अलर्ट घोषित किया है। यूपी से सटी कार्बेट टाइगर रिजर्व की दक्षिणी सीमा को सील कर दिया गया है। पिछले दो दिन से सीमाओं पर कड़ी चौकसी बरती जा रही है। वन मार्गों पर जरूरी काम से निकलने वाले वन सीमा से सटे गांवों के लोगों से उनकी आईडी जांची जा रही है, जिससे कोई वन्यजीवों के शिकार की मंशा से जंगल में प्रवेश न कर सके।
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वहीं कोटद्वार से पाखरो, मोरघट्टी और कालागढ़ तक सीटीआर की करीब 45 किमी की सीमा पर दिनरात सशस्त्र वन कर्मी गश्त कर रहे हैं। कालागढ़ वन प्रभाग के डीएफओ प्रकाश आर्य ने बताया कि जंगल में पार्टी करने का प्रयास करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। रात को वन कर्मियों की टीमें प्रमुख रास्तों और पैदल मार्गों पर नजर बनाए हुए है। वन विश्राम गृहों को भी केवल वन अधिकारियों के लिए ही खोला गया है।
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