दुगड्डा और यमकेश्वर विकासखंड में आपदा से क्षतिग्रस्त सात सड़कों को पीएमजीएसवाई खंड यातायात के लिए नहीं खोल सका है। इनमें ज्यादातर सड़कें अगस्त के दूसरे सप्ताह से ठप पड़ी हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इनमें कई सड़कों की हालत ज्यादा खराब है। जिनका एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया है। बजट मिलने के बाद ही मरम्मत का काम शुरू हो सकेगा। ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामों के लिए कई किमी पैदल चलना पड़ रहा है।
इस मानसून सत्र में पौड़ी जिले के दुगड्डा, कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र, यमकेश्वर व द्वारीखाल विकासखंड सबसे अधिक आपदा से प्रभावित रहे। आपदा से जहां सड़कों की दशा अत्यंत खराब हालत में है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में 7 सड़कें सितंबर के अंतिम पखवाड़े तक भी नहीं खुल सकी हैं। सरकारी उदासीनता का खामियाजा ग्रामीणों को उठाना पड़ रहा है। दुगड्डा की ब्लाक प्रमुख रुचि कैंतुरा का कहना है कि ग्रामीण अंचलों से रोज क्षेत्रवासी उनकी बंद सड़कों को खुलवाने की मांग के लिए फोन कर रहे हैं। कई बार विभागीय अधिकारियों को इस बारे में सूचना दी गई है। कई सड़कें खुली हैं, लेकिन पीएमजीएसवाई की सड़कें ज्यादा खराब हालत में हैं।
दुगड्डा विकासखंड में बल्ली-मथाणा मार्ग, बल्ली कांडई मार्ग, स्यालनी-स्यालकंडी मार्ग, आमसौड़-जमरगड्डी मार्ग, नौडखाल-माला से सिरासू मार्ग, नौडखाल माला -कोटा मार्ग बीते अगस्त माह से बाधित हैं। जिला पंचायत सदस्य विनोद डबराल, सतेंद्र नेगी, माला देवी, गजेंद्र सिंह नेगी, कल्याण सिंह समेत कई लोगों ने सरकार और विभागीय अधिकारियों पर क्षेत्र की अनदेखी का आरोप लगाया। कहा कि लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पीएमजीएसवाई के सहायक अभियंता विपिन सैनी ने बताया कि आपदा से प्रभावित सड़कों को जल्द खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं।