बीते माह आई आपदा में क्षतिग्रस्त पेयजल लाइन की मरम्मत के कारण बुधवार को पौड़ी नेशनल हाईवे पर चार घंटे आवाजाही बाधित रही। इस दौरान पुलिस प्रशासन और जल संस्थान के अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी के कारण पर्वतीय क्षेत्र से कोटद्वार बाजार आ रहे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जाम खुलने में ज्यादा समय लगने के कारण कई लोग तो सार्वजनिक वाहनों से उतरकर पैदल ही बाजार के लिए निकल गए।
दरअसल 13 अगस्त को आई आपदा के दौरान लोनिवि गोदाम और लालपुल के समीप पुश्ता क्षतिग्रस्त होने के कारण करीब आठ दिनों तक हाईवे बंद रहा था। पुश्ता निर्माण के बाद एनएच प्रशासन ने मार्ग पर आवाजाही शुरू करा दी थी। आपदा के बाद से ही जल संस्थान का पांचवें किमी. पर स्थित पंप हाउस भी बंद था। एक सप्ताह पहले ही जल संस्थान ने पंप हाउस को शुरू किया था, लेकिन क्षतिग्रस्त पुश्ते के समीप पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण बाजार क्षेत्र में पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पा रही थी।
बुधवार को कोटद्वार बंद के दौरान जल संस्थान की टीम पेयजल लाइन को ठीक करने पहुंचे। शाम तीन बजे से शुरू किया, लेकिन इससे एक घंटे पहले ही दुगड्डा चौकी पुलिस ने पर्वतीय क्षेत्रों से कोटद्वार आ रहे वाहनों को दुगड्डा में रोक दिया। जिससे इन वाहनों में फंसे शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारी भूखे प्यासे परेशान होते रहे। लोगों के विरोध को देखते हुए दो घंटे के बाद दुगड्डा से वाहनों को छोड़ा गया, लेकिन सिद्धबली के पास लालपुल के समीप फिर से वाहनों को रोक दिया गया। जिसके बाद कुछ लोग पैदल ही कोटद्वार के लिए निकल पड़े। जबकि कुछ लोगों ने अपने नाते रिश्तेदारों को फोन कर उन्हें बुलाया और उनके साथ रवाना हुए। जबकि बड़ी संख्या में लोग शाम तक यहां फंसे रहे।
बुधवार को चक्काजाम के कारण एनएच पर ट्रैफिक काफी कम था। इसलिए प्रशासन से अनुमति लेकर पाइपलाइन को ठीक करने का निर्णय लिया गया। डेकचून के पाइप होने के कारण काटने में समय लग गया। -बृजमोहन सिंह रावत, जेई, जलसंस्थान
गर्भवती महिला जाम में फंसी रही, ट्रेन भी छूटी
पुलिस प्रशासन और जलसंस्थान की लापरवाही के कारण एक गर्भवती महिला और उनके पिता की ट्रेन छूट गई। महिला को तमिलनाडु जाना था। इसके लिए उन्हें दिल्ली से ट्रेन पकड़नी थी। दिल्ली जाने के लिए उन्होंने सिद्धबली जनशताब्दी एक्सप्रेस से टिकट बुक कराया था, शाम चार बजे कोटद्वार स्टेशन से उन्हें ट्रेन पकड़नी थी। लेकिन, जाम में फंसे रहने के कारण वह लेट हो गईं और उनकी ट्रेन छूट गई। महिला माधवी ने बताया कि वह छह माह की गर्भवती है। उन्होंने बताया कि काफी देर तक वह और उनके पिता मुत्थू स्वामी पुलिस से गुहार लगाते रहे, उन्हें टिकट भी दिखाया, लेकिन पुलिस ने एक नहीं सुनी। बाद में वह लालपुल से पैदल ही कोटद्वार आए, लेकिन तब तक उनकी ट्रेन जा चुकी थी। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु में ऐसी स्थिति में वहां की पुलिस खुल लोगों को स्टेशन तक छोड़ने जाती है। कोटद्वार पुलिस का रवैया लारवाही भरा है।