भारतीय सेना में 12 हजार अफसरों की कमी है। फौज में अफसरों की कमी को दूर करने के लिए चयन प्रक्रिया में बदलाव की कवायद शुरू हो गई है।
वर्तमान में अफसरों को चयनित करने वाला सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (एसएसबी) अभ्यर्थियों की पांच दिन तक स्क्रीनिंग करता है। सेना इसे घटा कर तीन दिन तक करने की सोच रही है।
लेकिन मानकों और गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा। दिन घटने से और अधिक युवा सेलेक्शन बोर्ड के समक्ष उपस्थित हो सकेंगे।
सेना में अफसरों के लगभग 48000 हजार पद स्वीकृत हैं, जिसमें लगभग 23 प्रतिशत यानी 12 हजार पद रिक्त हैं।
इसी स्थिति को देखते हुए सेना प्रमुख ने डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ साइकोलॉजिकल रिसर्च और रिक्रूटमेंट डायरेक्टरेट को आईआईएम अहमदाबाद के साथ मिलकर चयन प्रक्रिया में जरूरी बदलाव करने के लिए रिपोर्ट तैयार करने को कहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आईआईएम अहमदाबाद अपने मानव संसाधन मूल्यांकन की आधुनिक तकनीक से पांच दिन के एसएसबी को चार या तीन दिन में निपटा सकता है। आईआईएम अहमदाबाद इसके लिए यूएस, ब्रिटिश आर्मी मॉडल का अध्ययन भी करेगा।
इक्का-दुक्का होते हैं चयनित
एसएसबी में औसतन 100 अभ्यर्थियों का बैच पांच दिन तक विभिन्न परीक्षण चरणों से गुजरता है। पहले दिन के स्क्रीनिंग टेस्ट में 20 फीसदी अभ्यर्थी बाहर हो जाते हैं। उसके बाद चार दिनों की कठिन परीक्षण में गुणवत्ता पर बमुश्किल दस फीसदी ही खरे उतरते हैं।
चयन प्रक्रिया को पांच दिन से घटाकर तीन दिन तक करने में कोई बुराई नहीं है बशर्ते गुणवत्ता पर असर न पड़े। आईआईएम अहमदाबाद जैसे संस्थान मूल्यांकन के सिस्टम को सुधारने में सक्षम हैं।
-लेफ्टिनेंट जनरल जीएस नेगी, पूर्व कमांडेंट आईएमए