जलप्रलय के बाद केदार बाबा की घाटी मनोरोग विशेषज्ञों के लिए ‘नई दुनिया’ बन गई है। देश-विदेश के विशेषज्ञ अब यह खोजने में लगे हैं कि इस खौफनाक तबाही का उन बच्चों के दिमाग पर क्या असर आएगा जो मां के पेट में हैं।
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विशेषज्ञों की आशंका है कि जलप्रलय के दौरान मां के पेट में रहे बच्चे मंदबुद्धि हो सकते हैं। उनकी याददाश्त की फैकल्टी में खराबी आ सकती है।
मानसिक स्थिति पर शोध
मनोरोग विशेषज्ञों की टीम आपदाग्रस्त क्षेत्रों की गर्भवती माताओं की मानसिक स्थिति पर शोध कर रही हैं। यह जानने की कोशिश की जा रही है कि मौत का नंगा नाच देखने के बाद उनके जेहन पर क्या असर पड़ा है? ट्रॉमा कितना गहरा है? गर्भवती कितने दिन से डिप्रेशन में हैं? इन बातों का असर उनके गर्भस्थ शिशु पर आ सकता है।
आपदाग्रस्त क्षेत्रों से लौटे रांची के सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ साइकेटरी के विशेषज्ञ डा. विनोद पाल का कहना है कि गर्भस्थ शिशु मंदबुद्धि हो सकता है। यह मां की मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है। आपदा के दौरान जिन गर्भवतियों को ट्रॉमा के साथ न्यूट्रियंट्स कम मिले उन्हें और भी समस्या हो सकती है।
यही बात हालैंड के विशेषज्ञ पता लगा रहे हैं। दिल्ली से आई इंस्टीट्यूट आफ ह्यूमन बिहेवियर की टीम के विशेषज्ञ भी इसी खोज में लगे रहे।
शिशु के जेहन पर असर पड़ सकता है
विशेषज्ञों की टीमें वैसे तो आपदा प्रभावित क्षेत्रों के हर व्यक्ति की मानसिक स्थिति का ब्योरा इकट्ठा कर रही हैं, लेकिन उनके लिए दिलचस्प खोज गर्भस्थ शिशुओं के संबंध में है। जौलीग्रांट मेडिकल कालेज के मनोरोग विशेषज्ञ डा.रवि गुप्ता का कहना है कि तबाही देखने के बाद मां की मानसिक स्थिति का शिशु के जेहन पर असर आ सकता है।
अगर कोई गर्भवती डिप्रेशन में है तो फौरन चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। कार्यवाहक महानिदेशक चिकित्सा डा. जेएस जोशी ने बताया कि मनोरोग विशेषज्ञों की 15 टीमें अध्ययन करके जा चुकी हैं। इतनी ही टीमें और आपदग्रस्त क्षेत्रों में दो दिन के अंदर आ जाएंगी।
गर्भस्थ शिशु पर ऐसे असर आएगा
गर्भवती के लंबे समय तक शॉक और डिप्रेशन की स्थिति में रहने पर शरीर में कार्टिसोल नामक हारमोन की मात्रा बढ़ जाती है। इसका प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर आता है। कार्टिसोल मस्तिष्क के हिप्पो कैम्पस नामक हिस्से पर बुरा असर डालता है। इससे वह हिस्सा डैमेज होने लगता है। इससे मंद्बुद्धिता, याददाश्त की कमी के अलावा हार्ट रेट, रेस्पेरेटरी रेट बढ़ सकता है। हारमोनल बैलेंस बिगड़ने से मस्तिष्क के दूसरे डिस्आर्डर भी हो सकते हैं।
ऐसे बच सकते हैं
-गर्भवती आपदा वाला क्षेत्र से हट जाएं
-फौरन मनोरोग विशेषज्ञ से संपर्क लें
-डिप्रेशन से निकलने के लिए काउंसलिंग कराएं
-गहरा आघात होने पर दवाएं लें
-तबाही की तरफ से ध्यान हटाने की कोशिश करें
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