उत्तराखंड में आई आपदा ने नौनिहालों की उडान पर भी रोक लगा दी है। आदिबदरी के आसपास एक दर्जन से अधिक गांवों को जोड़ने वाला पीपलचट्टी का पुल आटागाड़ नदी के उफान में बह गया। इससे करीब तीन हजार की आबादी का आदिबदरी से सीधा संपर्क कट गया है।
ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई को लेकर खासे चिंतित हैं। वह कहते हैं पुल बह गया है, अब वह भला अपने बच्चों को कैसे स्कूल भेजें। इन गांवों के 100 से अधिक बच्चे जीआईसी आदिबदरी में पढ़ने आते हैं। क्षेत्र के जैम, थापली, नगली, ढमकर, पज्याणा, हरगांव, हरसारी, तलसारी, स्यालकोट सहित अन्य गांवों को जोड़ने वाला आदिबदरी का मुख्य पीपलचट्टी का पुल आटागाड़ में समा गया।
शुक्रवार को अमर उजाला टीम ने आदिबदरी और आसपास के गांवों में पंहुचकर वहां बाढ़ प्रभावितों का हाल जाना। आदिबदरी मंदिर के सेवादार नरेंद्र चाकर ने बताया कि लोग आवश्यक सामग्री के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर उफनती आटागाड़ को पार कर बाजार आ रहे हैं। नदी के पार बसे एक दर्जन से अधिक गांवों के तीन हजार लोगों का संपर्क मुख्य बाजार से कट गया है।
पीपलचट्टी बाजार में रमेश बरमोला ने बताया कि ठीक बाजार के सामने उनका और अन्य आवासीय भवन है, लेकिन पुल बहने से सपंर्क कट गया है। ऐसे में या तो जान जोखिम में डालकर उफनती नदी को पार करना पड़ रहा है या दो किमी दूर जैम गांव जाकर दूसरे रास्ते से जो कि कंटीली झाड़ियों से पटा है, से गुजर कर बाजार तक पंहुच रहे हैं।
स्थानीय दुकानदार मुकेश खंडूरी बतातें हैं कि बाढ़ की भेंट चढ़े मुख्य पुल से 50 मीटर दूर एक पुल और है पर नदी के बहाव से एक किनारा बहने से यह पुल भी हवा में झूल रहा है। जबकि ओंकारेश्वर आश्रम से हरगांव के लिए बने पुल का भी यही हाल है।
प्रदेश में आई आपदा ने न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर ही ब्रेक लगा दिए हैं, बल्कि राज्य के सैंकडों बाशिंदो के माथे पर शिकन भी बढ़ा दी है। जिंदगी के लिए सूबे में चल रही जंग में वह नौनिहाल भी शामिल हैं, जिनके लिए उनका स्कूल ही सग-कुछ था। अब ग्रामीणों के आगे नौनिहालों को स्कूल भेजने की चिंता है, तो उनके भविष्य का डर भी।