हरीश रावत का रुख भले ही राजनीतिक विरोधियों के लिए नरम हो, लेकिन भूमाफिया और ब्लैकमेलरों के खिलाफ उनकी त्यौरी चढ़ी हुई है। उन्होंने कहा कि वह चीफ जस्टिस से अनुरोध करेंगे कि वर्ष 2007 से अब तक भ्रष्टाचार के मामलों के निस्तारण के लिए स्पेशल बेंच गठित कर दें।
रावत ने कहा कि जमीनें प्रदेश की जनता की मिल्कियत हैं, जिन्होंने इन पर डाका डाला है, उन डकैतों को वह खोज निकालेंगे। भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग जारी रहेगी।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बताया कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने उन्हें लंबी सूची सौंपी है। उस पर काम किया जाएगा। बहुत से लोग संपत्ति बनाने के लिए पब्लिक लाइफ में आए हैं। प्रदेश की जनता के पास घर बनाने के लिए जगह नहीं है और लोगों ने अवैध कब्जा करके बड़े-बड़े संस्थान बना लिए हैं। जमीनों से अवैध कब्जे हटाए जाने चाहिए।
ब्लैकमेलरों पर तिरछी नजर
ब्लैकमेलरों और माफिया राज से खत्म करने की दिशा में काम किया जाएगा। एक सवाल के जवाब में कहा कि कुछ ब्लैक मेलर तो अब भाजपा में चले गए हैं। न चाहते हुए भी दबाव में उन्हें एक व्यक्ति को जिम्मेदारी देनी पड़ी थी। खनन के संबंध में भाजपा के आरोप को निराधार बताया और कहा कि 15 करोड़ से ऊपर राजस्व नहीं मिला। उन्होंने किसी को खनन का पट्टा और क्रेशर की अनुमति नहीं दी। जिसने पट्टे दिए, वह अब भाजपा में है।
बोले रावत
जो पूर्व मुख्यमंत्री यह दावा कर रहे हैं कि मेरे पास आय से अधिक संपत्ति है, वे अपनी संपत्ति मुझसे बदल लें। वे अपनी संपत्ति मुझे दे दें और मेरी ले लें।
-हरीश रावत