पंचपुरी में हरकी पैड़ी सहित गंगा के कई घाटों पर छठ पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया। गंगा तट पर हजारों महिलाओं ने कमर तक जल में खड़े होकर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य प्रदान किया। सवेरे उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद तीन दिवसीय व्रत का समापन होगा। सूर्य छिप जाने के बाद जोरदार आतिशबाजी भी गंगा तटों पर की गई।
पूर्वांचल निवासी महिलाएं रविवार की शाम अपने सिर पर टोकरे में अनेक प्रकार के कंदमूल और फल लेकर गंगा तटों पर पहुंची। कई भागों से गंगा तट पर बैंड बाजों के साथ शोभायात्रा निकाली गई। छठ मैया के गीत गाते हुए महिलाओं ने डाला पर्व मनाया। वैदी पर कलश स्थापित कर टोकरे में से फल और पकवान निकालकर डूबते सूर्य को प्रदान किए। परिवार सहित लोक कल्याण की कामना की गई और पश्चिम की ओर मुख कर अर्घ्य प्रदान किया गया। घाटों पर जगह जगह पंडाल सजाए गए थे। हरकी पैड़ी पर पूर्व विधायक रामयश सिंह, जन जागृति संस्था के संरक्षक कमलेश्वर मिश्र, अध्यक्ष ब्रह्मशंकर चौबे आदि ने छठ व्रत का गुणगान किया। दीप प्रज्वलित कर दीप पूजन किया गया। पंडितों ने छठ व्रत की कथा भी सुनाई। गंगा मैय्या में गाय का दूध चढ़ाया गया।
हरकी पैड़ी, अग्रसेन घाट, भूमाघाट, प्रेमनगर आश्रम घाट, विश्वकर्मा घाट, सिंहद्वार, ज्वालापुर के दुर्गा घाट, सीता घाट, कनखल के सतीघाट और राजघाट पर विशेष आयोजन किए गए थे। गंगा की नीलधारा में भी उस पार पूर्वोत्तर वासी छठ पूजा कर रहे थे। पूरी रात घरों में जागरण हुआ। घरों में छठ मैया के पूजा स्थलों पर प्रात:कालीन और मध्यकालीन आरती भी की गई। सिडकुल और भेल बड़ी संख्या में महिलाएं छठ पूजा के लिए गंगा घाटों पर पहुंची। पर्व का समापन सोमवार की सवेरे उगते सूर्य को अर्घ्य प्रदान करने के बाद किया जाएगा। तब महिलाएं पूर्व दिशा में मुख कर अर्घ्य प्रदान करेंगी।