सब्जी मंडी ज्वालापुर में अन्य प्रदेशों से सब्जी नहीं पहुंची। बाहरी प्रदेशों से सब्जी नहीं आने के कारण पुरानी सब्जी ही मनमाने दामों पर बेची गई।
जनता कर्फ्यू के बाद अगले दिन लगे लॉक डाउन के दिन सब्जियों की आवक ठीक रही। सब्जियों को थोक रेट में हिसाब से बेचा गया, जबकि ग्राहकों के न पहुंचने से आढ़तियों के पास सब्जियां का स्टॉक बच गया था। धारा 144 लगा दिए जाने से मंगलवार को सब्जी मंडी ज्वालापुर में अन्य प्रदेशों से आने वाली सब्जियां नहीं आ सकी। ऐसे में सब्जी के दाम एकाएक बढ़ गए। एक दिन पहले टमाटर दस रुपये किलो बिका था, मंगलवार को उसकी कीमत 30 रुपये किलो थी। मटर भी 10 के बजाय 30 रुपये तक, गोभी-आलू 10 के बजाय 25 रुपये, लौकी 8-10 के बजाय 20 रुपये तक बेची गई।
मंडी में कुछ आढ़तियों की दुकान पर पीठ बाजार में सब्जी बेचने वाले लघु व्यापारी अपनी सब्जी बेचते हुए दिखाई दिए। हरिद्वार में सभी पीठ बाजार बंद कर दिए गए हैं। इसके चलते हुए वे अपनी सब्जी को मंडी में बेचते हुए मिले।
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सैनिटाइज के नियमों का नहीं होता मिला पालन
सब्जी मंडी में सामाजिक दूरी और सैनिटाइज का पालन दूर-दूर तक होता नहीं मिला। मंडी में पिछले दिनों के मुकाबले में बहुत कम खरीदार थे, लेकिन कोरोना वायरस से बचाव के लिए किसी भी नियम का पालन होता नहीं मिला। केवल आढ़ती और नाममात्र को ही कुछ लोग मास्क लगाए हुए मिले।
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मंडी में सब्जियों की आवक पर ज्यादा असर नहीं है। कुछ प्रदेशों से आवक में देर हुई। सब्जियों के रेट में कोई अंतर नहीं रहा। पूर्व की भांति ही सब्जियों को बेचने के निर्देश आढ़तियों को दिए हुए थे। आने वाले दिनों में लॉक डाउन का असर देखने को मिलेगा।
- दिग्विजय सिंह देव, मंडी सचिव।