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‘हिन्दू धर्म का सबसे प्राचीन एवं पवित्र ग्रंथ है वेद ’

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गुरुकुल कांगडी विवि के श्रद्धानंद वैदिक शोध संस्थान में आयोजित व्याख्यान-माला में संबोधित करते - फोटो : HARIDWAR
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गुरुकुल कांगड़ी विवि के श्रद्धानंद वैदिक शोध संस्थान में व्याख्यान-माला आयोजित हुई। वेद विभाग के वरिष्ठ प्रो. मनुदेव बंधु ने ऋग्वेद पर बोलते हुए कहा कि सृष्टि के प्रारंभ में ईश्वर ने संसार के कल्याण के लिए चार वेदों का ज्ञान दिया।
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उन्होंने कहा कि अग्नि ऋषि को ऋग्वेद का, वायु ऋषि को यजुर्वेद का, आदित्य ऋषि को सामवेद का और अंगिरा ऋषि को अथर्व वेद का ज्ञान दिया गया। ये चारों ऋषि ईश्वर की दृष्टि में योग्य थे। उन्हें आदेश दिया गया कि तुम सब आने वाली पीढ़ी को इस विद्या का उपदेश दो। तब यह वेद श्रुति नाम से प्रचलित हुआ। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती के शब्दों में हम कह सकते हैं ‘वेद सब सत्यविद्याओं का पुस्तक है। वेद का पढ़ना-पढ़ाना और सुनना सनाना सब आर्यों का परम धर्म है’।
प्रो. रामप्रकाश वर्णी ने कहा कि हिंदू धर्म का सबसे प्राचीन एवं पवित्र ग्रंथ वेद है। वेद ऐसे ग्रंथ हैं जो ब्रह्मांड के ज्ञान विज्ञान की विद्या प्रदान करते हैं। वेद को सरलता से पढ़ने एवं स्मरण रखने के लिए चार विभागों में विभाजित किया गया है। प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने कहा कि ऋग्वेद आर्यों एवं भारतीयों की ही नहीं विश्व की सबसे प्राचीन पुस्तक है। व्याख्यान सभा में टेसूराज गौड़, मनीष राणा, सचिन कुमार, अतुल आर्य, बहादुर सिंह चौहान आदि उपस्थित रहे।
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