परम गौवंश संरक्षक, आध्यात्मिक विभूति ब्रह्मलीन स्वामी अमलानंद गिरि महाराज को उनकी सातवीं पुण्यतिथि पर श्री त्रिपुरा योग आश्रम कनखल में स्वामी शरद पुरी के सानिध्य में स्वामी दर्शनानंद एवं आचार्य चिंतामणि के संयोजन में श्रद्धांजलि दी गई।
स्वामी शरद पुरी ने ब्रह्मलीन स्वामी अमलानंद गिरि महाराज को स्मरण करते हुए हुए कहा कि वह विद्वान संत थे। उन्हें गौवंश के संरक्षण विशेषकर साहीवाल नस्ल के गौवंश संरक्षण के लिए जाना जाता है। स्वामी निरंजन स्वामी और स्वामी दर्शनानंद ने कहा कि स्वामी अमलानंद त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति थे। त्रिपुरा योग आश्रम ट्रस्ट के सचिव अशोक राणा ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी अमलानंद गिरि महाराज ने गंगा तट पर श्री त्रिपुरा योग आश्रम स्थापित कर योग साधना के केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित किया। इस मौके पर उनके शिष्य राजन सिंह, लक्ष्मी सिंह, संजय वर्मा, अनीता वर्मा, पवन सिक्का, नम्रता, प्रभात, कृष्ण चंद्र, विनित, हिमांशु, वागीश, सुनीता और गणेश जोशी मौजूद रहे।