आखिरकार दो साल बाद अभ्यर्थियों को दीपावली पर्व पर नियुक्ति का तोहफा दे ही दिया गया है। अब स्कूलों में शिक्षकों का टोटा भी कम हो जाएगा।
शिक्षा विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2018-19 में राजकीय प्राथमिक विद्यालय में रिक्त चल रहे शिक्षकों के 70 पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। भर्ती प्रक्रिया को लेकर बार बार विवाद खड़े होते रहे। जिसमें कुछ अभ्यर्थियों की ओर से जहां कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। वहीं, कोरोना संक्रमण के चलते भी भर्ती प्रक्रिया बाधित हुई। इस कारण दो साल से भर्ती प्रक्रिया लटकी हुई पड़ी थी। जबकि कई विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी थी। इससे पठन पाठन प्रभावित हो रहा था। कई स्कूल एकल शिक्षक के भरोसे चल रहे थे। शिक्षक के अवकाश पर चले जाने से स्कूल में ताला लटक जाता था। अब कोर्ट से विवाद खत्म होने के बाद मेरिट लिस्ट के आधार पर चयनित 70 अध्यापकों में से 45 को सभी प्रक्रिया पूरी करने के बाद जनपद के विभिन्न राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्त करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। संवाद
काउंसिलिंग में नहीं पहुंचे 25 अभ्यर्थी
70 पदों के लिए जारी हुई मेरिट लिस्ट में 25 अभ्यर्थी अपनी काउंसिलिंग के लिए नहीं पहुंचे। शिक्षा विभाग की ओर से अब इन खाली रिक्त पदों को भरने के लिए वेटिंग लिस्ट निकालने की तैयारी की जा रही है। जिसमें नियमानुसार कुल पदों के सापेक्ष 25 फीसदी पदों पर प्रतीक्षा सूची जारी की जाएगी। करीब 18 और अभ्यर्थियों को शिक्षक बनने का मौका मिल सकेगा।
दुर्गम में दी गई पहली तैनाती
मेरिट सूची में आए अधिकांश अभ्यर्थियों को दुर्गम क्षेत्रों के विद्यालयों में पहली तैनाती दी गई है। विद्यालय भी अधिकतर उन्हें वह आवंटित किए गए हैं, जहां एक ही अध्यापक रह गए थे।
नवनियुक्त अध्यापकों को 15 दिनों के भीतर आवंटित विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। इस अवधि में कार्यभार ग्रहण न करने वाले अध्यापकों की नियुक्त स्वत: ही निरस्त हो जाएगी।
- डॉ. विद्या शंकर चतुर्वेदी, जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा)