इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने वाले शिया वक्फ बोर्ड यूपी के पूर्व चेयरमैन जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी उर्फ वसीम रिजवी के संन्यास की प्रक्रिया तीन दिन चलेगी। इसके लिए संतों की बैठक में संन्यास दीक्षा की तिथि घोषित करने पर विचार विमर्श किया गया। 29 मई से 10 जून के बीच में संन्यास की प्रक्रिया कराई जाएगी।
हरिद्वार के वेद निकेतन में 17 से 19 नवंबर तक हुई धर्मसंसद में मर्यादित भाषण के मामले में जेल भेजे गए जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी के सुप्रीम कोर्ट से तीन माह की अंतरित जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद वह संन्यास लेने की तैयारी कर रहे हैं। इसको लेकर वह लगातार साधु संतों से भी संपर्क कर रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने अखिल भारतीय अखिल परिषद के अध्यक्ष व मां मनसा देवी मंदिर के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी से शांभवी पीठाधीश्वर व काली सेना संस्थापक के साथ स्वामी आनंद स्वरूप के साथ पहुंचकर मुलाकात की थी। इसके साथ ही उन्होंने जगद्गुरु शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज से भी मुलाकात की थी। अब वसीम रिजवी के संन्यास की प्रक्रिया को लेकर शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप लगातार तैयारियों में जुटे हुए हैं। इसको लेकर बुधवार की शाम सात बजे से निरंजनी अखाड़े में संतों की बैठक भी हुई। जिसमें सन्यास परंपरा को लेकर संतों ने विचार विमर्श किया। स्वामी आनंद स्वरूप ने बताया कि जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी के संन्यास की प्रक्रिया तीन दिन गंगा घाट पर चलेगी। जिसमें पहले दिन मुंडन कर शिखा रोक दी जाएगी। दूसरे दिन अग्नि के साथ वास रहेगा और तीसरे दिन दंड दीक्षा के समय शिखा को काट दिया जाएगा। इसके बाद संत परंपरा के अनुसार नया नाम मिलेगा।