कोटा मुरादनगर गांव में हुए दर्दनाक हादसे की वजह मानवीय भूल ही बनी है। आटा चक्की की मशीन तो बंद कमरे में लगी है और उसके चक्के व पट्टे खुले में थे। पांच साल का मासूम अर्श नहीं समझ पाया कि जिसको वह कोई खेल समझ रहा वह लोहे का साफ्ट (धुरे) उसकी और सोनम की मौत का कारण बन जाएगा।
कोटा मुरादनगर गांव में चौहल सिंह सैनी की आटा चक्की है। जानकारी के अनुसार चौहल सिंह का निधन हो चुका और अब उनका बेटा सोनू चक्की को चलाते हैं। यह चक्की पुरानी जमाने की है। पिसाई करने वाली मशीन तो बंद कमरे में लगी। चक्की के पट्टे और साफ्ट बाहर खुले हैं। शाम को जब बच्चे चक्की पर पहुंचे तो मासूम अर्श खुले में लगे साफ्ट की तरफ चला गया। बताया जाता है कि वह साफ्ट की तरफ गया तो उसका कपड़ा उसमें फंस गया और उसके साथ घूमने लगा। सोनम ने जब अर्श को घूमते देखा तो उसको बचाने के लिए चली गई। सोनम की चुन्नी भी साफ्ट पर फंस गई। अन्य बच्चों को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने शोर मचाया। चक्की के शोर में सोनू को बच्चों की आवाज सुनाई नहीं दी। जब तक पता चलता और चक्की को बंद करते तब तक बहुत देर हो चुकी थी। रुस्तम की दो संतानों में अर्श दूसरे नंबर का था। जबकि शौकीन की पांच संतानों में सोनम दूसरे नंबर की थी। शौकीन व रुस्तम गांव में ही खेती करते हैं।
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ग्रामीण क्षेत्र में आज भी धुरे वाली आटा चक्की
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी धुरे वाली आटा चक्की हैं। धुरे वाली आटा चक्की में धुरे और चरखी को बाहर लगाया जाता है। जबकि उसकी मशीन अंदर रहती है। धुरे व चरखी पर लगे इंजन को स्टार्ट करने के बाद काम शुरू किया जाता है। जिसके बाद चक्की चलाने वाला व्यक्ति अंदर जाकर काम करने लगता है।