टीचर एसोसिएशन ऑफ फिजिकल एजुकेशन की ऑनलाइन दो दिवसीय कार्यशाला बुधवार से शुरू हो गई। उद्घाटन सत्र में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रो. डॉ. शिवकुमार चौहान ने कहा कि खेल सिर्फ मैदान पर खेलने का ही नाम नही है। न ही फुर्ती और ताकत का प्रदर्शन है। मैदान के अलावा खेल इंसान के दिमाग में होता है। कोई खिलाड़ी अपने दिमाग में खेल जीत जाता है तो मैदान में भी उसके जीतने की उम्मीद होती है। यानी खिलाड़ी की जीत में साईकॉलजी की भूमिका प्रमुख होती है।
उन्होंने खिलाड़ियों के प्रशिक्षण शिविर में खिलाड़ी जीवन में मनोविज्ञान का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को मानसिक रूप से चुस्त दुरुस्त रहना जरूरी है। जिससे शारीरिक और मानसिक तौर पर फिट रह सकें। स्पोर्ट्स मनोविज्ञान खिलाड़ी पर दो तरह से काम करता है। एक रिसर्च के रूप मे खेल सुविधा विस्तार और दूसरी कोच के रूप में थेरेपी, काउंसिलिंग, दिमागी अभ्यास और दवाओं के माध्यम से खिलाड़ी की मदद करता है।
उन्होंने कहा कि भारत में क्रिकेट, बैडमिंटन, टेनिस तो जैसे एक धर्म ही बन चुके है। खेलों के साथ खेल मनोचिकित्सकों की जरूरत भी लगातार बढ़ती जा रही है। अमेरिका और आस्ट्रेलिया में खिलाड़ियों की मानसिक एवं शारीरिक स्थिति सुधार के लिए खेल मनोचिकित्सक को हायर किया जाता है। कार्यशाला में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के शिक्षाविद्, मनोवैज्ञानिक, खिलाड़ी उपस्थित रहे। इस दौरान प्रो. सुधा चंद्रा, प्रो. आरपी सिंह, प्रो. जेडी सिंह आदि उपस्थित रहे।