हरिद्वार। अगले कुंभ पर अद्भुत खगोलीय घटना होने जा रही है। प्रत्येक शताब्दी में ऐसा एक बार होता है। अर्द्घकुंभ बीतने के छह वर्षों के बजाए अगला महाकुंभ पांच वर्ष बाद ही आ जाएगा। हरिद्वार कुंभ वर्ष 2010 में हुआ था। अगला कुंभ 2021 में आ रहा है।
एक कुंभ नगर में कुंभ और अर्द्घकुंभ छह-छह वर्ष बाद आते हैं। पूर्ण कुंभ मेलों के बारे में प्रचलित है कि 12 वर्ष बाद ही अगला कुंभ आता है। वास्तव में हरिद्वार कुंभ बृहस्पति पर टिका हुआ है। 12 साल बाद बृहस्पति जब पुन: कुंभस्थ होतेे हैं, तो कुंभ होता है। खगोल शास्त्र के अनुसार यह अवधि घड़ी-पल घटने बढ़ने से पूरे 12 वर्ष के बजाय 11 वर्ष, 11 महीने और 27 दिन में पूरी हो जाती है। 12 वर्षों में इस तरह 50.5 दिन कम हो जाते हैं। यह कमी बढ़ते-बढ़ते सातवें और आठवें कुंभ के बीच पूरे एक वर्ष की हो जाती है। नतीजतन हरिद्वार में प्रत्येक आठवां कुंभ 12 के बजाय 11वें वर्ष में पड़ जाता है। अगली बार ऐसा ही होने जा रहा है।
पिछली शताब्दी में तीसरा कुंभ 1927 में हुआ था। गुरु की चाल के कारण चौथा कुंभ 1939 के बजाय 1938 में 11वें वर्ष ही आ गया। यह पिछली शताब्दी की एक मात्र घटना थी। वर्तमान 21वीं शताब्दी में एक बार होने वाली इस घटना की उल्टी गिनती वर्ष 2010 से शुरू हो चुकी है। अर्द्घकुंभ पांचवें वर्ष ही विश्वभर के श्रद्धालुओं को कुंभ का आनंद लेने का अवसर प्राप्त हो जाएगा।
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