खाली पड़ी लालढांग में प्रस्तावित मॉडल डिग्री कॉलेज के बने के लिए जगह ।
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हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के लालढांग में प्रस्तावित मॉडल डिग्री कॉलेज के निर्माण की राह में खड़ी हो रही बाधाएं दूर होने का नाम नहीं ले रही हैं। कॉलेज निर्माण शुरू नहीं होने से क्षेत्र के युवाओं का उच्च शिक्षा पाने का इंतजार बढ़ता ही जा रहा है।
मालूम हो कि करीब डेढ़ साल पहले केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत देशभर में 70 मॉडल डिग्री कॉलेज खोलने की स्वीकृति दी थी। उसमें उत्तराखंड को दो मॉडल डिग्री कॉलेज मिले थे। इनमें एक कुमाऊं के किच्छा और दूसरा हरिद्वार के लालढांग में बनना था। इसके लिए मीठीबेरी में ग्राम पंचायत ने जमीन भी उपलब्ध करा दी थी। पिछले साल तीन फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये इसका शिलान्यास भी कर दिया था। इसके बाद कार्यदायी संस्था ब्रिडकुल ने प्रस्तावित जमीन पर काम शुरू किया तो वन विभाग ने यह कहकर रुकवा दिया कि जमीन ग्राम पंचायत की नहीं वन विभाग की है। तब से यह मामला अधर में लटका है। पिछले दिनों वन विभाग और राजस्व विभाग ने एक बार फिर से जमीन की पैमाइश की। इस पैमाइश में भी जमीन वन विभाग की निकली। वन भूमि हस्तांतरित होने में एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। शासन ने अब वन विभाग को जमीन हस्तांतरित करने को कहा है। इसलिए निर्माण में देरी होती जा रही है।
इस मॉडल कॉलेज की विशेषता
मालूम हो कि यह डिग्री कॉलेज बाकी अन्य कॉलेजों से अलग होगा। इसमें छात्रों को आधुनिक और टेक्नोलॉजी वाली शिक्षा दी जानी है। इसके साथ ही कॉलेज में अत्याधुनिक लैब होंगी। यहां पढ़ने वाले छात्रों को रोजगारपरक शिक्षा देने पर जोर होगा।
पिछड़ा क्षेत्र है लालढांग
लालढांग क्षेत्र हरिद्वार का पिछड़ा इलाका है। यहां उच्च शिक्षण संस्थान नहीं हैं। अधिकांश गरीब परिवारों के बच्चे इंटर के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं। कामोवेश यही स्थिति लड़कियों की भी हैं। यहां के लोगों को इंटर से आगे की पढ़ाई के लिए हरिद्वार आना पड़ता है।