उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की ओर से ऑनलाइन अखिल भारतीय संस्कृत कवि सम्मेलन में देश और प्रदेश के 10 संस्कृत कवियों ने प्रतिभाग किया। कवियों ने काव्यपाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर किया।
संपूर्णानंद संस्कृत विवि के पूर्व कुलपति पद्मश्री प्रो. अभिराज राजेंद्र मिश्र ने कहा कि विश्व में प्रामाणिक ज्ञान-विज्ञान अनुसंधान एवं चिंतन का आधार संस्कृत भाषा ही है। संस्कृत के बिना भारतीय ज्ञान, विज्ञान, संस्कृति, संस्कार और अन्य भारतीय भाषाओं को जानना कठिन है। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत हमारी वैज्ञानिकता एवं आध्यात्मिकता का स्रोत है। उन्होंने कहा वाल्मीकि रामायण से आज तक संस्कृत में जितने भी काव्य, महाकाव्य लिखे, उन सभी में मानवता, वैज्ञानिकता, आध्यात्मिकता, सामाजिकता, समरसता और नैतिकता निहित है।
दूरदर्शन के पूर्व निदेशक डॉ. सुभाष चंद्र थलेड़ी ने कहा कि संस्कृत साहित्य में जितना ज्ञान भंडार है, उतना विश्व के किसी भी साहित्य में नहीं है।
प्रो. राजेंद्र मिश्र, प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी, डॉ. राजेंद्र त्रिपाठी रसराज, डॉ. सुरचना त्रिवेदी, डॉ. श्रीनाथधर द्विवेदी, डॉ. रामविनय सिंह, आचार्य सुरेशानंद गौड, डॉ. हेमचंद्र बेलवाल, डॉ. राहुल पोखरिया ने रचनाएं पढ़ी। संचालन अकादमी के शोध अधिकारी डॉ. हरीशचंद्र गुरुरानी ने किया।
इससे पूर्व अकादमी परिसर में कोषाध्यक्ष कन्हैया राम सार्की ने ध्वजारोहण कर महात्मा गांधी एवं लालबहादुर शास्त्री की प्रतिमाओं में पुष्पअ र्पित किए। इस दौरान प्रो. जगदीश प्रसाद सेमवाल, डॉ. शैलेश कुमार तिवारी, डॉ. कीर्ति वल्लभ, जानकी त्रिपाठी, डॉ. अरविंद तिवारी, डॉ. एमके सुरेश बाबू, डॉ. सर्वेश शांडिल्य, डॉ. मनीषा सिंह मौजूद रहे।