हरिद्वार। उत्तरी हरिद्वार के घाटों पर गंगा जल लाने की मांग को लेकर साधु-संत छह दिनों से अनशन कर रहे हैं। इसके बावजूद किसी घाट पर मलबा हटाकर गंगाजल लाने का प्रयत्न किसी विभाग द्वारा नहीं किया गया। मंगलवार को सरकार की चुप्पी के खिलाफ साधु-संतों ने भूमाघाट पर आक्रोश व्यक्त किया।
इस दौरान जयराम पीठाधीश्वर ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि गंगा को लेकर समस्त भारत का संत जगत चिंतित है। नमामि गंगे की घोषणा के बावजूद केंद्र इस दिशा में कुछ नहीं कर पाई है। उमा भारती गंगा रक्षा करने में नाकाम साबित हुई है। महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने कहा कि गंगा के लिए आज भी पूरा संत समाज एकजुट नहीं हुआ है। संत एक मंच पर आएं तो गंगा को निर्मल बहने से कोई नहीं रोक सकता। महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद ने कहा कि गंगा की लड़ाई आसान नहीं है। प्रत्येक सरकार ने गंगा की उपेक्षा की हैं। आज गंगा में जितना जल दिखाई दे रहा है वह अगले 40 वर्षों में पूरी तरह लुप्त हो जाएगा। स्वामी ऋषिश्वरानंद ने कहा कि केदारनाथ आपदा से सरकार से कोई सबक नहीं सीखा है। गंगा में रेत जमा है जिसे निकालने का प्रबंध सरकार ने अब तक नहीं किया है। परिणामस्वरूप गंगा ने घाटों को छोड़ दिया है। श्रीमहंत विनोद गिरी ने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब घाटों पर गंगा बहेंगी। मंगलवार के धरने और अनशन पर महंत शिवशंकर गिरी, महामंडलेश्वर प्रेमानंद, प्रेमदास, विनोद महाराज, मंगलदास, आत्मानंद, विद्यागिरी, महेशानंद, उत्तरा गिरी, विजय कौशल गिरी, साध्वी रंजना, माधवानंद, चन्द्रकांता आदि बैठे। आयोजक संतों ने दावा किया कि सभी अखाड़ों के प्रतिनिधि आंदोलन में भाग ले रहे हैं। देहरादून जाकर प्रदर्शन की तिथि के बारे में विचार-विर्मश किया गया।