मकर संक्रांति से अग्नि, खिचड़ी, गुड़ और तिल के पर्व प्रारंभ हो जाएंगे। यह पर्व ऋतु आनंद का पर्व है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन से सूर्य का तापमान बढ़ने लगता है।
शुक्रवार 14 जनवरी को भगवान भास्कर धनु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य का यह प्रवेश रात्रि में 2.28 बजे होगा, जिसका पुण्यकाल प्रात: 8.04 बजे से प्रारंभ हो जाएगा। सूर्यनारायण की उत्तरायण यात्रा प्रारंभ होगी और इसी दिन से विवाह आदि मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। मकर संक्रांति ही वह दिन है जब हेमंत ऋतु का समापन होगा और शिशिर ऋतु शुरू हो जाएगी।
विज्ञापन
होलिका दहन तक चलते हैं अग्नि पर्व
मकर संक्रांति से अग्नि, खिचड़ी, गुड़ और तिल के पर्व प्रारंभ हो जाएंगे। यह पर्व ऋतु आनंद का पर्व है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन से सूर्य का तापमान बढ़ने लगता है। देश के दक्षिणी राज्यों में मकर संक्रांति को पोंगल पर्व के रूप में मनाया जाता है। लोहड़ी से शुरू होने वाले अग्नि पर्व होलिका दहन तक चलते हैं।
मकर के सूर्य का नाता उनके पुत्र शनि की राशि से जुड़ता है। सूर्य के मकर में आने से ऋतु परिवर्तित होती और शुक्र उदित हो जाते हैं। यह दिन मांगलिक पर्वों के आरंभ से जुड़ा पर्व है। गंगा आदि पवित्र नदियों के तटों पर मकर संक्रांति पर स्नान करने के लिए लाखों श्रद्धालु आते हैं। यह वर्ष का पहला स्नान पर्व है। साथ ही कार्तिक पूर्णिमा से पर्वों को मिले विश्राम का भी समापन हो जाता है।
कोविड की एसओपी में नहीं स्नान का कोई जिक्र, व्यापारियों में भी असमंजस
14 जनवरी को मकर संक्रांति है। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान के लिए उत्तर भारत से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। इस बार स्नान पर कोरोना का साया मंडरा रहा है। शासन और जिला प्रशासन की ओर से जारी कोविड एसओपी में मकर संक्रांति के स्नान का कहीं जिक्र नहीं है। जिससे संत और श्रद्धालु ही नहीं बल्कि स्नान पर्व का इंतजार करने वाले हरिद्वार के व्यापारियों में भी असमंजस बना है।
मकर संक्रांति स्नान साल का सबसे बड़ा और पहला पर्व है। उत्तर भारत से श्रद्धालु गंगा स्नान करने हरिद्वार आते हैं। श्रद्धालुओं की आवाजाही भी हरिद्वार के बाजारों की पूरी अर्थव्यवस्था निर्भर रहती है। पिछले साल कोरोना की दूसरी लहर की शुरुआत में मकर संक्रांति पर पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई थी। इस साल जनवरी केपहले सप्ताह से कोरोना संक्रमण तेजी से फैलने लगा है। संक्रमण का प्रसार देखते हुए शासन और जिला प्रशासन ने कोविड एसओपी जारी कर दी है। दोनों ही एसओपी में मकर संक्रांति स्नान का कोई जिक्र नहीं।
महानगर व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष सुनील सेठी का कहना है कि मकर संक्रांति पर लाखों लोग हरिद्वार आते हैं। इस बार कोविड का साया है। प्रशासन को पहले ही स्नान को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन जारी करनी चाहिए। ताकि व्यापारी अपनी दुकानों में उसी हिसाब से मॉल आर्डर कर सकें। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं तक स्नान होने या नहीं होने की जानकारी पहुंच सके। व्यापारी नेता जितेंद्र चौरसिया का कहना है कि मकर संक्राति स्नान को लेकर प्रशासन जितनी देरी से निर्णय लेगा, उतनी ही सभी की परेशानी बढ़ेगी। शादी से लेकर शव यात्रा पर सरकार ने एसओपी जारी कर दी है तो स्नान को लेकर जल्द स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
कोविड प्रसार तेजी से हो रही है, इसे नकारा नहीं जा सकता है। शासन और प्रशासन को मकर संक्रांति स्नान को लेकर अपनी स्थिति समय रहते स्पष्ट करनी चाहिए। - श्रीमहंत रविंद्रपुरी, अध्यक्ष अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं सचिव श्री निरंजनी अखाड़ा
मकर संक्रांति को लेकर शासन की ओर से गाइडलाइन का इंतजार किया जा रहा है। संभवत दस जनवरी तक स्थिति साफ हो जाएगी। यदि शासन से गाइडलाइन नहीं मिलती है तो जिला प्रशासन मकर संक्रांति को लेकर अपनी गाइड लाइन जारी करेगा। - बीएस बुदियाल, एडीएम वित्त एवं राजस्व
16 जनवरी तक सभी धरना-प्रदर्शन, रैली पर रोक है। सार्वजनिक स्थानों और भीड़भाड़ वाले इलाकों पर एसओपी का सख्ती से पालन करवाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। बार्डर पर दोनों डोज लगवाने का प्रमाणपत्र दिखाने या एंटीजन टेस्ट के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है। मकर संक्रांति को लेकर एक-दो दिन में फैसला हो जाएगा। - डॉ. सौरभ सिंह गहरवार, सीडीओ